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चमोली में बारिश बनी मुसीबत, कहीं उफनते गदेरे को पार कर स्कूल जा रहे बच्चे तो कहीं पोकलैंड की बकेट बनी ग्रामीणों का सहारा

दिनांक: 7 अगस्त 2026
स्थान: चमोली, उत्तराखंड

उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली में मानसून की बारिश ने ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं आपदा में क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों का पुनर्निर्माण नहीं होने से ग्रामीण उफनते गदेरों को पार करने के लिए मजबूर हैं, तो कहीं सड़क पर आए मलबे और दलदल ने आवाजाही रोक दी है। हालात इतने चुनौतीपूर्ण हैं कि ग्रामीणों को पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर सड़क का अवरुद्ध हिस्सा पार करना पड़ रहा है।


मौख गाड़ पार करना ग्रामीणों की मजबूरी

चमोली के नंदानगर घाट क्षेत्र के कई गांवों में सितंबर 2025 की आपदा के निशान अब भी दिखाई दे रहे हैं। आपदा के दौरान कई पैदल रास्ते पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन लंबे समय बाद भी उनका पुनर्निर्माण नहीं हो सका है।

मानसून में मौख गाड़ का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। रोजमर्रा के काम के लिए लोगों को तेज बहाव के बीच इसी गदेरे को पार करना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा मुश्किल स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर अभिभावक अपने छोटे बच्चों को पीठ पर बैठाकर उफनते गदेरे को पार कर स्कूल तक पहुंचाने के लिए मजबूर हैं। पानी का बहाव तेज होने के कारण हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है।


बीमारी और आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पैदल मार्ग और पुल के अभाव में सामान्य दिनों में भी आवागमन कठिन है, जबकि बारिश के दौरान स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत और पैदल पुल के निर्माण की मांग की है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

आपात स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो उसे सुरक्षित तरीके से मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं, लगातार प्रभावित रास्तों के कारण बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।


देवाल-वाण मोटर मार्ग पर भूस्खलन से संकट

चमोली के देवाल-वाण मोटर मार्ग पर भी बारिश ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। गामरी गाड़ के पास सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र में बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर और दलदल सड़क पर आ गया।

मलबा जमा होने से सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। कई वाहन दलदल में फंस गए, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई। सड़क बंद होने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है।


पोकलैंड की बकेट में बैठकर सड़क पार करने की मजबूरी

सड़क पर मलबा और दलदल होने के कारण ग्रामीणों के लिए पैदल निकलना भी आसान नहीं है। ऐसे में लोग पोकलैंड मशीन की मदद से अवरुद्ध हिस्से को पार कर रहे हैं।

बारिश के बीच कुछ ग्रामीण पोकलैंड मशीन की बकेट में बैठकर सड़क पार करते दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जो क्षेत्र में बनी चुनौतीपूर्ण स्थिति को उजागर करता है।

हालांकि इस तरह सड़क पार करना जोखिम भरा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि आवाजाही के लिए तत्काल कोई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में ऐसे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।


करीब आठ हजार लोगों की आवाजाही प्रभावित

देवाल-वाण मोटर मार्ग पर गामरी गाड़ से आगे सड़क बाधित होने के कारण आसपास के गांवों की करीब आठ हजार की आबादी प्रभावित बताई जा रही है।

सड़क बंद होने से ग्रामीणों को इलाज, राशन, दैनिक जरूरतों की खरीदारी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए देवाल पहुंचने में परेशानी हो रही है। मानसून के दौरान सड़क के बार-बार बाधित होने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित विभाग भूस्खलन प्रभावित हिस्से को जल्द सुरक्षित करें और सड़क को नियमित यातायात के लिए बहाल किया जाए।


सीमांत क्षेत्रों में सुविधाओं पर उठे सवाल

चमोली की ये तस्वीरें मानसून के दौरान सीमांत क्षेत्रों में सड़क और पैदल संपर्क की स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं। एक ओर जहां आपदा से क्षतिग्रस्त रास्तों का स्थायी पुनर्निर्माण अब भी अधूरा है, वहीं दूसरी ओर बारिश के साथ भूस्खलन और मलबा ग्रामीणों के लिए नई मुश्किलें पैदा कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात खत्म होने का इंतजार करने के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए, ताकि हर मानसून में लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन न करना पड़े।


निष्कर्ष

चमोली के नंदानगर घाट और देवाल-वाण क्षेत्र की स्थिति मानसून के दौरान ग्रामीण इलाकों की जमीनी चुनौतियों को सामने ला रही है। कहीं बच्चे उफनते गदेरे को पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं, तो कहीं हजारों लोगों की आवाजाही भूस्खलन से प्रभावित है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल राहत के साथ क्षतिग्रस्त पैदल मार्गों, पुलों और सड़कों का स्थायी समाधान करे, ताकि बारिश के मौसम में लोगों की जिंदगी खतरे में न पड़े।

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