दिनांक: 7 अगस्त 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड के किसानों और पशुपालकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गौ पालन योजना का विस्तार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अब तक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों तक सीमित योजना का दायरा बढ़ाकर सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी इसमें शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत सामान्य वर्ग के पशुपालक भी गाय या भैंस खरीदने के लिए सरकार से सब्सिडी प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पशुपालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाना है।
अब गाय के साथ भैंस खरीदने का भी विकल्प
पशुपालन विभाग की ओर से संचालित गौ पालन योजना में अभी तक मुख्य रूप से गाय खरीदने के लिए सहायता दी जाती थी। योजना के विस्तार के बाद लाभार्थियों को गाय के साथ भैंस खरीदने का विकल्प भी दिया गया है।
सरकार ने योजना में पशु की यूनिट कॉस्ट को भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले एक गाय की यूनिट कॉस्ट 40 हजार रुपये निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर गाय या भैंस के लिए 60 हजार रुपये कर दिया गया है।
सामान्य वर्ग को 36 हजार रुपये की सब्सिडी
नई व्यवस्था में सामान्य वर्ग के पशुपालकों के लिए सरकार कुल यूनिट कॉस्ट का 60 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में देगी।
60 हजार रुपये की यूनिट कॉस्ट के आधार पर सामान्य वर्ग के लाभार्थी को 36 हजार रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलेगी, जबकि पशुपालक को अपने हिस्से के रूप में 24 हजार रुपये का योगदान करना होगा।
इससे सामान्य वर्ग के छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए पशुपालन शुरू करना पहले की तुलना में आसान होगा।
SC/ST लाभार्थियों को पहले की तरह 90 प्रतिशत सहायता
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए योजना में सब्सिडी का अनुपात पहले की तरह 90 प्रतिशत रखा गया है।
60 हजार रुपये की यूनिट कॉस्ट पर एससी/एसटी लाभार्थियों को सरकार की ओर से 54 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जबकि लाभार्थी को केवल 6 हजार रुपये अपने हिस्से के रूप में देने होंगे।
इस तरह योजना के विस्तार के बाद दोनों वर्गों के पशुपालकों को अलग-अलग अनुपात में सरकारी सहायता उपलब्ध होगी।
पहले चरण में 2128 पशुपालकों को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार योजना के विस्तार से पहले साल में एससी, एसटी और सामान्य वर्ग के कुल 2,128 पशुपालकों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इन लाभार्थियों को योजना से जोड़ने के लिए सरकार पर करीब 978.12 लाख रुपये का वित्तीय भार आने का अनुमान है। योजना के जरिए अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को पशुपालन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर
राज्य सरकार का मानना है कि पशुपालन को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। गाय और भैंस से मिलने वाले दूध के अलावा पशुओं से प्राप्त जैविक खाद का इस्तेमाल खेती में किया जा सकता है।
सरकार के अनुसार योजना का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में भी मदद कर सकता है। इससे गांवों से होने वाले पलायन को रोकने में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम
उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ पशुपालन लंबे समय से आय का महत्वपूर्ण साधन रहा है। सरकार अब सब्सिडी के जरिए अधिक परिवारों को इस गतिविधि से जोड़ना चाहती है।
सामान्य वर्ग को योजना में शामिल करने और गाय के साथ भैंस खरीदने का विकल्प देने से लाभार्थियों के सामने पशुधन चुनने के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
निष्कर्ष
धामी कैबिनेट के फैसले के बाद उत्तराखंड की गौ पालन योजना का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हो गया है। अब सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी गाय या भैंस खरीदने पर 36 हजार रुपये तक की सरकारी सब्सिडी मिल सकेगी, जबकि एससी/एसटी लाभार्थियों को 54 हजार रुपये तक की सहायता जारी रहेगी। सरकार को उम्मीद है कि योजना के विस्तार से पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर मजबूत होंगे।


