दिनांक: 6 अगस्त 2026
स्थान: ऋषिकेश, देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से ऋषिकेश में चल रहे ‘सम्मान सेतु’ अभियान में महिलाओं, कांवड़ श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। 4 अगस्त से 8 अगस्त तक सीमा डेंटल कॉलेज के सामने आयोजित इस शिविर में अब तक हजारों लोगों ने विधिक परामर्श, स्वास्थ्य जांच और साइबर अपराध से संबंधित सहायता का लाभ उठाया है।
शिविर का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ कांवड़ यात्रा के दौरान नारी सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश देना है।
महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया अभियान का उद्देश्य
शिविर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि आयोग का प्राथमिक उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को समस्या के समाधान और न्याय की प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि महिला को अपनी समस्या के समाधान के लिए हमेशा आयोग के कार्यालय तक आने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। आयोग फोन, पुलिस थानों और शासन-प्रशासन के साथ समन्वय के जरिए मौके पर ही समस्याओं के समाधान की दिशा में काम कर रहा है।
कुसुम कंडवाल के अनुसार, महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद महिलाओं को संरक्षण देना, पारिवारिक विवादों में संवाद और काउंसलिंग के जरिए समाधान तलाशना तथा महिलाओं तक सरकारी सहायता पहुंचाना भी आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कांवड़ यात्रा में नारी सम्मान का संदेश
महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि यात्राएं केवल धार्मिक या सामाजिक आयोजन नहीं होतीं, बल्कि समाज के संस्कार और सोच को भी प्रदर्शित करती हैं। इसी भावना के साथ ‘सम्मान सेतु’ अभियान के माध्यम से कांवड़ यात्रा के दौरान महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिविर में महिलाओं के साथ-साथ कांवड़ श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों को भी महिला अधिकारों तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
7200 से ज्यादा जागरूकता किट वितरित
अभियान के दौरान महिला अधिकारों, नए आपराधिक कानूनों, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित पॉश एक्ट और नारी शक्ति वंदन अधिनियम की जानकारी देने वाली करीब 7,200 से अधिक जागरूकता किट वितरित की जा चुकी हैं।
इन किट के माध्यम से महिलाओं, कांवड़ यात्रियों और स्कूली बच्चों को कानूनी अधिकारों तथा उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी दी जा रही है।
578 लोगों को मुफ्त कानूनी परामर्श
शिविर में अधिवक्ताओं की टीम ने जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कानूनी परामर्श उपलब्ध कराया। जानकारी के अनुसार 6 अगस्त की दोपहर तक कुल 578 लोगों को कानूनी सलाह दी जा चुकी थी।
इसके अलावा पारिवारिक विवादों से जुड़े 26 मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से समाधान की दिशा में कार्रवाई की गई।
489 से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण
शिविर में कानूनी सहायता के साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। एम्स ऋषिकेश के सहयोग से अब तक 489 से अधिक लोगों का मेडिकल चेकअप किया गया है।
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक चिकित्सा संबंधी सहायता शिविर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
124 साइबर अपराध मामलों का निस्तारण
बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए शिविर में साइबर सुरक्षा से संबंधित सहायता भी उपलब्ध कराई गई। अभियान के दौरान साइबर अपराध से जुड़े 124 मामलों का त्वरित निस्तारण किए जाने की जानकारी दी गई।
आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराध की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
युवाओं को AI से जोड़ने की तैयारी
महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बताया कि आयोग महिलाओं और युवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसी क्रम में ‘यशोदा AI’ ट्रेनिंग प्रोग्राम पर कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही वन स्टॉप सेंटर के कार्मिकों के प्रशिक्षण और कानूनों की समीक्षा से जुड़े विषयों पर भी आयोग की ओर से काम किया जा रहा है।
जागरूकता के जरिए मजबूत करने की कोशिश
महिला आयोग का कहना है कि इस तरह के शिविरों का उद्देश्य केवल मौके पर शिकायतों का समाधान करना नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी है।
आयोग के अनुसार महिलाओं और बेटियों को अपने अधिकारों की जानकारी होने से वे समस्याओं के खिलाफ समय पर उचित मंच पर शिकायत कर सकती हैं। वहीं, आम नागरिकों को भी महिला सम्मान और सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में ऐसे अभियानों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
ऋषिकेश में चल रहा ‘सम्मान सेतु’ अभियान महिला अधिकारों, कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं और साइबर जागरूकता को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की पहल के रूप में सामने आया है। 7,200 से अधिक जागरूकता किट वितरण, 578 लोगों को कानूनी परामर्श, 26 पारिवारिक मामलों में काउंसलिंग, 489 से अधिक स्वास्थ्य जांच और 124 साइबर मामलों के निस्तारण के आंकड़े अभियान की पहुंच को दर्शाते हैं। महिला आयोग का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान नारी सम्मान और सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को न्याय और सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।


