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उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों की मतदाता सूची में 96 हजार से अधिक नाम, अब घर-घर होगा सत्यापन

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 26 अगस्त 2026

उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर-2026 के दौरान देहरादून जिले की मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। जिले में 96,187 ऐसे मतदाता चिह्नित किए गए हैं, जिनके नाम उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में भी दर्ज हैं। अब निर्वाचन विभाग ऐसे मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन करेगा और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार किसी एक राज्य की मतदाता सूची में रहने का विकल्प दिया जाएगा।

निर्वाचन आयोग की टीम ने देहरादून पहुंचकर की समीक्षा

भारत निर्वाचन आयोग की टीम ने मंगलवार को देहरादून पहुंचकर जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डा. आशीष चौहान, उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह और एसआईआर के लिए तैनात सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की गई।

बैठक में मतदाता सूची की मैपिंग, सत्यापन, नोटिस जारी करने और आपत्तियों के निस्तारण सहित पुनरीक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई। आयोग की टीम ने रैंडम जांच, ऑडिट और पर्यवेक्षण के आधार पर चल रही प्रक्रिया की स्थिति भी परखी।

दोनों राज्यों की सूची में नाम वाले मतदाताओं का होगा सत्यापन

देहरादून जिले में 96,187 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनके नाम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। निर्वाचन विभाग अब इन मतदाताओं से संपर्क कर यह सुनिश्चित करेगा कि वे वास्तविक रूप से किस राज्य में मतदाता के रूप में पंजीकृत रहना चाहते हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने आयोग की टीम को बताया कि ऐसे मतदाताओं को उनकी इच्छा के अनुसार एक राज्य की मतदाता सूची में रहने का विकल्प दिया जा रहा है। बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ घर-घर जाकर संबंधित मतदाताओं को पूरी प्रक्रिया की जानकारी देंगे और उनकी स्वेच्छा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पात्र मतदाता का नाम हटाने में बरती जाएगी सावधानी

निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दोहरी प्रविष्टियों की जांच के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाए। किसी भी पात्र मतदाता को मताधिकार से वंचित न किया जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक पूरा करने को कहा गया है।

आयोग का जोर इस बात पर है कि केवल रिकॉर्ड में समानता मिलने के आधार पर किसी मतदाता के नाम को जल्दबाजी में हटाया न जाए। संबंधित व्यक्ति की वास्तविक स्थिति और उसकी इच्छा की पुष्टि के बाद ही आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

11.90 लाख से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी

देहरादून जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अब तक 11,90,805 मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। पुनरीक्षण के दौरान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित विवरण में विसंगति मिलने अथवा आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले मामलों में बीएलओ के माध्यम से नोटिस जारी किए गए हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 21 अगस्त तक ऐसे 5,47,617 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके थे। इनमें से करीब 90 प्रतिशत मामलों में सुनवाई पूरी किए जाने की जानकारी आयोग की टीम को दी गई।

प्रारूप-7 की आपत्तियों के निस्तारण पर विशेष निगरानी

बैठक में प्रारूप-7 के तहत प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण को लेकर भी आयोग की टीम ने अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। बड़ी संख्या में प्राप्त आपत्तियों की जांच के दौरान निष्पक्षता और निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करने पर जोर दिया गया।

किसी मतदाता की मृत्यु या स्थानांतरण के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले संबंधित जानकारी का बीएलओ स्तर पर सत्यापन कराने को कहा गया है। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए से भी क्रास-वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रमाण-पत्र नहीं देने वाले मतदाताओं से दोबारा संपर्क

आयोग की टीम ने उन मतदाताओं से दोबारा संपर्क करने के निर्देश भी दिए, जिन्होंने निर्धारित 11 प्रमाण-पत्रों में से अब तक कोई प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे मतदाताओं को प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाए और उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया जाए।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेजों की कमी या प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रह जाए।

अधिकारियों को पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के निर्देश

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन आयोग का मुख्य जोर मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के साथ पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर है। दो राज्यों में नाम दर्ज होने वाले मामलों की जांच से लेकर आपत्तियों के निस्तारण तक प्रत्येक स्तर पर दस्तावेजी सत्यापन और क्रास-वेरिफिकेशन को प्राथमिकता दी जा रही है।

बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी राकेश तिवारी, अपर्णा ढौंडियाल, रविंद्र ज्वांठा, अपूर्वा सिंह और कुमकुम जोशी समेत सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र प्रसाद देवली मौजूद रहे।

निष्कर्ष

देहरादून जिले में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों की मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होने का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने सत्यापन प्रक्रिया तेज कर दी है। 96,187 दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं से घर-घर संपर्क कर उनकी वास्तविक स्थिति और पसंद की जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची को शुद्ध करने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित न हो।

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