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साइबर अपराधियों पर उत्तराखंड STF का बड़ा प्रहार, सात दिनों में 15 गिरफ्तारियां, 820 संदिग्ध बैंक खातों की जांच

देहरादून, 3 सितंबर 2026

उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर शिकंजा कसते हुए उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सात दिवसीय विशेष अभियान ऑपरेशन हॉटस्पॉट के दौरान साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 247 संदिग्धों को कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं।

एसटीएफ ने इस अभियान में केवल ठगी करने वाले अपराधियों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि उन लोगों और नेटवर्क की भी पहचान की गई जो साइबर अपराधियों को बैंक खाते, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, चेक और अन्य डिजिटल एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर अपराध को बढ़ावा दे रहे थे।

पुलिस के अनुसार, 24 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलाए गए अभियान के दौरान 820 संदिग्ध बैंक खातों की गहन जांच की गई। जांच के आधार पर विभिन्न मामलों में 159 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

1236 एटीएम निकासी स्थानों की जांच

ऑपरेशन हॉटस्पॉट के तहत साइबर ठगी की रकम निकालने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 1236 एटीएम निकासी स्थानों की भी जांच की गई। जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर 32 एफआईआर दर्ज की गईं।

इसके अलावा चेक के माध्यम से संदिग्ध रकम निकालने वाले 84 स्थानों की जांच की गई, जिसके आधार पर 37 एफआईआर दर्ज की गईं।

644 संदिग्ध सिम और 630 आईएमईआई बंद

एसटीएफ और पुलिस की तकनीकी जांच में साइबर अपराध से जुड़े 644 संदिग्ध सिम कार्ड और 630 आईएमईआई नंबरों की पहचान की गई। इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए आवश्यक कानूनी और तकनीकी कदम उठाए गए।

अभियान के दौरान 442 संदिग्ध मामलों की जांच की गई। वहीं सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले 22 संदिग्ध सिम पॉइंट ऑफ सेल की जांच के बाद 10 एफआईआर दर्ज की गईं।

कार्रवाई से पहले एक महीने तक चला तकनीकी विश्लेषण

एसटीएफ के अनुसार ऑपरेशन हॉटस्पॉट अचानक शुरू किया गया अभियान नहीं था। इसके लिए पहले एक महीने तक डिजिटल, दूरसंचार और वित्तीय सूचनाओं का तकनीकी विश्लेषण किया गया।

1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 के बीच साइबर सुरक्षा अभियान चलाकर संदिग्ध मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड, आईएमईआई नंबरों, साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों, एटीएम निकासी केंद्रों और चेक के माध्यम से रकम निकालने वाले स्थानों की जानकारी जुटाई गई।

अलग-अलग तकनीकी और वित्तीय स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का मिलान कर कार्रवाई योग्य जानकारी तैयार की गई। इसके बाद पुलिस और एसटीएफ की टीमों ने चिन्हित क्षेत्रों में पहुंचकर जांच और कानूनी कार्रवाई की।

I4C के प्रतिबिंब प्लेटफॉर्म से मिली मदद

साइबर अपराध के प्रमुख ठिकानों और नेटवर्क की पहचान करने के लिए पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के प्रतिबिंब प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया।

डिजिटल, दूरसंचार, वित्तीय और भौगोलिक आंकड़ों के विश्लेषण के जरिए उन स्थानों की पहचान की गई जहां से साइबर अपराध संचालित होने या ठगी की रकम के लेनदेन की आशंका थी।

इस तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से संदिग्ध सिम, आईएमईआई नंबर, बैंक खाते, सिम पॉइंट ऑफ सेल, एटीएम और चेक के जरिए रकम निकालने वाले स्थानों को चिन्हित किया गया।

हरिद्वार में नवादा ग्रुप का पर्दाफाश

ऑपरेशन के दौरान हरिद्वार जिले में एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। थाना श्यामपुर पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर नवादा ग्रुप नाम से सक्रिय बताए जा रहे साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया।

पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

तकनीकी जांच में इस गिरोह से जुड़े 200 से अधिक बैंक खातों की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार इन खातों में साइबर ठगी की रकम के सीधे लेनदेन से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।

45 से अधिक एटीएम कार्ड और दो लैपटॉप बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 45 से अधिक एटीएम कार्ड, 20 बैंक पासबुक, दो लैपटॉप और 17 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को लोन दिलाने, ऑनलाइन कारोबार में मुनाफा कराने और पैसा दोगुना करने जैसे आकर्षक प्रस्ताव देकर ठगी करते थे।

ठगी की रकम पहले ऐसे बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी जिनका उपयोग रकम को आगे अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया जाता था। इसके बाद एटीएम से नकदी निकालने और सीडीएम के माध्यम से अन्य खातों में रकम जमा या स्थानांतरित कर धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता था।

वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधी और संदिग्ध चिन्हित

उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 के दौरान अब तक 240 साइबर अपराधियों और संदिग्धों का विवरण I4C के समन्वय पोर्टल पर दर्ज किया है।

इन लोगों के विवरण का दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर अपराध के मामलों से मिलान करने पर 100 से अधिक अंतरराज्यीय कड़ियां सामने आई हैं।

इन कड़ियों के आधार पर संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर संदिग्धों के आपराधिक इतिहास की जांच, मामलों का मिलान और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।

दूसरे राज्यों को भेजे गए 303 नोटिस

साइबर मामलों की जांच में अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने के लिए साइबर इन्वेस्टिगेशन असिस्टेंट रिक्वेस्ट के माध्यम से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत दूसरे राज्यों को 303 नोटिस भेजे गए।

वहीं दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर अपराध मामलों से जुड़े उत्तराखंड के आरोपियों और संदिग्धों के संबंध में प्राप्त 247 नोटिसों की तामील भी उत्तराखंड पुलिस द्वारा कराई गई।

1930 और NCRP के जरिए 23.44 करोड़ रुपये की रकम बचाई

उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 में साइबर अपराध से पीड़ित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर भी तेजी से कार्रवाई की।

अब तक प्राप्त 18,749 साइबर अपराध शिकायतों पर पुलिस, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वय से कार्रवाई करते हुए करीब 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को समय रहते रोका गया।

इसी अवधि में दर्ज 683 ई-जीरो एफआईआर में से 659 मामलों को नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया गया या संबंधित मामलों में शामिल किया गया।

साइबर ठगी से बचाव के लिए छात्रों को किया जागरूक

साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उत्तराखंड पुलिस ने जागरूकता अभियान पर भी विशेष जोर दिया है।

27 अगस्त 2026 को आयोजित राज्यव्यापी ऑनलाइन साइबर जागरूकता कार्यक्रम में प्रदेश के 1100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक, साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण, ऑनलाइन गेमिंग के खतरे, डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर होने वाली ठगी, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया सुरक्षा तथा 1930 हेल्पलाइन और NCRP के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।

चार जिलों में दो हजार पुलिसकर्मियों की विशेष कार्रवाई

3 सितंबर 2026 को देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जिलों के चिन्हित साइबर अपराध प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया।

एसटीएफ की तकनीकी टीमों के साथ संबंधित जिलों की पुलिस के करीब दो हजार पुलिसकर्मियों को अभियान में लगाया गया।

इस दौरान 300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल संसाधनों की जांच कर रही है।

उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों के खिलाफ नोटिस जारी करने, एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी सहित आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

एसटीएफ का कहना है कि ऑपरेशन हॉटस्पॉट समाप्त होने के बाद भी साइबर अपराधियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

एडीजी कानून व्यवस्था वी. मुरुगेशन के अनुसार प्रतिबिंब, NCRP और अन्य तकनीकी माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का लगातार विश्लेषण किया जाएगा। साइबर अपराध प्रभावित क्षेत्रों, ठगी की रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों, संदिग्ध खातों, सिम पॉइंट ऑफ सेल और अपराध में इस्तेमाल होने वाले अन्य डिजिटल एवं वित्तीय संसाधनों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

उत्तराखंड STF का ऑपरेशन हॉटस्पॉट प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की व्यापक कार्रवाई में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अभियान में केवल साइबर ठगों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि उनके पूरे आर्थिक और तकनीकी नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।

बैंक खातों, एटीएम कार्डों, सिम कार्डों, आईएमईआई नंबरों और रकम के लेनदेन की श्रृंखला तक पहुंचकर पुलिस साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले दिनों में तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से इस कार्रवाई को और तेज किए जाने की संभावना है।

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