डोईवाला, देहरादून | 3 सितंबर 2026
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के हर्रावाला परिसर में छात्रों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। लंबित परीक्षाओं और परीक्षा परिणाम घोषित न होने से नाराज बीएएमएस छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ दोबारा मोर्चा खोल दिया। बुधवार रात से शुरू हुआ धरना गुरुवार सुबह और उग्र हो गया, जब चार छात्र विरोध दर्ज कराने के लिए परिसर में स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए।
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। टंकी पर चढ़ने वाले छात्रों में दो छात्राएं और दो छात्र शामिल बताए गए हैं। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
सूचना मिलने पर डोईवाला कोतवाली पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस और प्रशासन की टीमें टंकी पर चढ़े छात्रों को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए लगातार बातचीत और समझाइश का प्रयास कर रही हैं।
परीक्षाएं और परिणाम लंबित होने से नाराज छात्र
आंदोलन कर रहे छात्रों का मुख्य आरोप है कि उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं की जा रही हैं। जिन परीक्षाओं का आयोजन हो चुका है, उनके परिणाम भी लंबे समय से घोषित नहीं किए गए हैं।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा और परिणामों में लगातार हो रही देरी से उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। इससे आगे की पढ़ाई, प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाओं को लेकर उनके सामने गंभीर परेशानी खड़ी हो गई है।
छात्रों के अनुसार उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष कई बार अपनी समस्याएं रखीं और लिखित शिकायतें भी दीं, लेकिन अब तक उनकी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है।
उनका आरोप है कि लंबे समय से लंबित शैक्षणिक प्रक्रियाओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है और विश्वविद्यालय प्रबंधन को इस मामले में तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
दस दिन पहले भी टंकी पर चढ़े थे छात्र
यह पहला मौका नहीं है जब छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया है। करीब दस दिन पहले भी बीएएमएस छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन किया था और उस दौरान कुछ छात्र पानी की टंकी पर चढ़ गए थे।
तब प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से छात्रों को समझाने का प्रयास किया गया था। छात्रों के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से समस्याओं के समाधान के लिए दस दिनों के भीतर कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया गया था।
बताया गया कि उस समय काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद छात्रों को रात करीब एक बजे पानी की टंकी से नीचे उतारा गया था।
लिखित आश्वासन के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा दिए गए दस दिनों के आश्वासन की अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन उनकी प्रमुख समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इसी से नाराज होकर छात्रों ने दोबारा आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया।
बुधवार रात से सैकड़ों बीएएमएस छात्र विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। गुरुवार सुबह तक आंदोलन तेज हो गया और चार छात्र पानी की टंकी पर चढ़ गए।
परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
चार छात्रों के पानी की टंकी पर चढ़ने की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। डोईवाला पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली।
पुलिस की प्राथमिकता टंकी पर मौजूद छात्रों को सुरक्षित नीचे उतारना और परिसर में किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है। विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस बल की तैनाती के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
आंदोलन को मिलने लगा राजनीतिक समर्थन
छात्रों के इस आंदोलन को अब राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। छात्रों के समर्थन में कांग्रेस और भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि भी सामने आए हैं।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मोहित उनियाल भी मौके पर पहुंचे और छात्रों की समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया जा रहा है।
मोहित उनियाल ने कहा कि छात्रों के हितों से जुड़े मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उनकी शैक्षणिक समस्याओं का जल्द समाधान होना आवश्यक है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती
लगातार दूसरी बार छात्रों के पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध करने से उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और लंबित शैक्षणिक मामलों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्रों की प्रमुख मांग समय पर परीक्षाएं आयोजित कराना और पहले से हो चुकी परीक्षाओं के परिणाम जल्द घोषित करना है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन और शासन की ओर है कि छात्रों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में दोबारा शुरू हुआ छात्र आंदोलन इस बात का संकेत है कि छात्रों की लंबित शैक्षणिक समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। दस दिन पहले मिले लिखित आश्वासन के बावजूद कार्रवाई न होने के आरोप के बाद छात्रों का आक्रोश फिर सामने आया है।
चार छात्रों के पानी की टंकी पर चढ़ने और सैकड़ों छात्रों के धरने पर बैठने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन छात्रों को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास में जुटे हैं, जबकि छात्र अपनी मांगों के समाधान पर अड़े हुए हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षाओं और परिणामों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए क्या निर्णय लेता है और क्या छात्रों का यह आंदोलन जल्द समाप्त हो पाता है।



