देहरादून/हरिद्वार, 7 सितंबर 2026
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड की सियासत में बड़ा मुद्दा बन चुका है। सोमवार को राजधानी देहरादून से लेकर हरिद्वार तक भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन किया। देहरादून में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो भाजपा ने गांधी पार्क में धरना देकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। वहीं हरिद्वार में भाजपा के प्रदर्शन के दौरान लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक खेमों में माने जाने वाले कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए।
हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला 8 अगस्त का है, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। कांग्रेस की सभा खत्म होने के चार दिन बाद 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्याय से जुड़े कार्यकर्ताओं ने रामलीला मैदान और मंच पर गंगाजल का छिड़काव किया और हवन-पूजन किया।
इस कार्रवाई को कांग्रेस ने गंभीर मुद्दा बताते हुए आरोप लगाया कि खड़गे की दलित पृष्ठभूमि के कारण उनके कार्यक्रम के बाद मंच का कथित शुद्धिकरण किया गया। कांग्रेस ने इसे छुआछूत, सामाजिक भेदभाव और दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस ने बताया दलित समाज का अपमान
कांग्रेस का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद मंच को गंगाजल से धोना और उसका शुद्धिकरण करना महज सफाई का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक भेदभाव की मानसिकता दिखाई देती है।
पार्टी नेताओं ने इसे दलित सम्मान से जोड़ते हुए भाजपा पर राजनीतिक और सामाजिक जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि इस घटना ने उत्तराखंड जैसे राज्य में सामाजिक समरसता और समानता के मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भाजपा ने संगठन से खुद को किया अलग
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों से खुद को अलग करते हुए कहा कि जिस संगठन की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धिकरण किया गया, उसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है।
भाजपा का कहना है कि मैदान में गंदगी और कथित तौर पर आपत्तिजनक सामग्री पाए जाने के बाद वहां सफाई और हवन-पूजन किया गया था। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इस प्रक्रिया में वाल्मीकि समाज के लोग भी शामिल थे। भाजपा ने कांग्रेस पर इस घटना को जातिगत विवाद का रूप देने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी के बयान के बाद और गरमाया मामला
विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर तब और चर्चा मिली, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 29 अगस्त को दिल्ली में प्रेस वार्ता कर हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण मामले को छुआछूत और दलितों के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
राहुल गांधी की प्रेस वार्ता के अगले दिन 30 अगस्त को अमित नाम के व्यक्ति ने हल्द्वानी पुलिस को उनके खिलाफ तहरीर दी। शिकायत में राहुल गांधी पर अनुसूचित जनजाति की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
इसके बाद कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी की ओर से भी प्रदेश के अलग-अलग थानों में शिकायतें दी गई थीं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कांग्रेस की ओर से बेंगलुरु में भाजपा के कुछ नेताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कराए जाने की बात भी सामने आई।
देहरादून में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन
मामले को लेकर सोमवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता देहरादून पहुंचे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया।
प्रदर्शनकारियों ने हल्द्वानी प्रकरण को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मामले में कार्रवाई की मांग उठाई। मुख्यमंत्री आवास घेराव के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।
गांधी पार्क में भाजपा का जवाबी प्रदर्शन
कांग्रेस के प्रदर्शन के समानांतर भाजपा ने देहरादून के गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में प्रदेश पदाधिकारी, विधायक, मंत्री और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि पार्टी हल्द्वानी के एक विवाद को बढ़ाकर प्रदेश में सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है।
खजानदास ने कांग्रेस पर लगाया माहौल बिगाड़ने का आरोप
कैबिनेट मंत्री खजानदास ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां सभी समाजों के सम्मान की परंपरा रही है। उन्होंने कांग्रेस पर जातिगत राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी रामलीला मैदान में जो कार्रवाई हुई, उससे भाजपा का कोई संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, मैदान में सफाई के बाद हवन-पूजन किया गया था और इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाया जा रहा है।
हरिद्वार में भी भाजपा का धरना
हल्द्वानी विवाद को लेकर हरिद्वार में भी भाजपा ने विरोध प्रदर्शन किया। यहां आयोजित धरने में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मंत्री खजानदास समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम की खास चर्चा इसलिए हुई क्योंकि लंबे समय बाद भाजपा के ऐसे कई नेता एक मंच पर दिखाई दिए, जिन्हें पार्टी की आंतरिक राजनीति में अलग-अलग खेमों से जोड़कर देखा जाता रहा है।
एक मंच पर नजर आए कई वरिष्ठ नेता
धरने में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, पूर्व विधायक संजय गुप्ता और दर्जाधारी नेता ओमप्रकाश जमदग्नि एक साथ बैठे दिखाई दिए।
राजनीतिक जानकार इस तस्वीर को हरिद्वार भाजपा में एकजुटता के संदेश के तौर पर देख रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान लगाए गए पोस्टरों में डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर भी प्रमुखता से लगाई गई थी। कार्यकर्ताओं के हाथों में मौजूद बैनरों में कांग्रेस पर दलित विरोधी राजनीति करने के आरोप लगाए गए।
मदन कौशिक बोले- सामाजिक समरसता खराब करने का प्रयास
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कांग्रेस पर देश के बाद उत्तराखंड में भी सामाजिक माहौल खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में भाजपा की ओर से धरना आयोजित किया गया है।
वहीं, हरिद्वार भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस झूठे प्रचार के जरिए प्रदेश का सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में धर्म और जाति के आधार पर सामाजिक विभाजन की स्थिति नहीं रही है और भाजपा कांग्रेस के ऐसे प्रयासों का विरोध करेगी।
दोनों दलों के प्रदर्शन से प्रशासन अलर्ट
सोमवार को भाजपा और कांग्रेस के अलग-अलग कार्यक्रमों के चलते देहरादून और हरिद्वार में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। देहरादून में कांग्रेस के मुख्यमंत्री आवास घेराव और भाजपा के गांधी पार्क धरने के कारण प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना पड़ा।
हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक रूप से तूल दिया गया मामला बता रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।
निष्कर्ष
हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण प्रकरण ने उत्तराखंड की राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है। देहरादून और हरिद्वार में हुए प्रदर्शनों से साफ है कि भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। एक ओर कांग्रेस मामले को सामाजिक सम्मान और भेदभाव से जोड़कर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए विवाद को बढ़ाने का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले का राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम उत्तराखंड की सियासत को और प्रभावित कर सकता है।


