दिनांक: 20 सितंबर 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। पार्टी ने अपने ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के तहत पिछले पांच वर्षों में बंद किए गए 826 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को लेकर सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी ने इसके लिए सरकार को 10 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर 2 अक्टूबर के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
826 सरकारी स्कूल बंद होने पर उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के नॉर्थ जोन कोऑर्डिनेटर श्रेष्ठ सिंह ने रविवार को उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 826 प्राथमिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में स्कूलों के बंद होने का मामला सामने आया है।
श्रेष्ठ सिंह ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 270 स्कूलों में पीने के पानी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि पहाड़ी जिलों के कई विद्यालयों में बच्चों को पर्याप्त शिक्षक और जरूरी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच उपलब्ध सुविधाओं में अंतर को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
स्कूलवार रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से बंद किए गए सभी 826 सरकारी स्कूलों की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी के अनुसार रिपोर्ट में प्रत्येक स्कूल से जुड़ी कई जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इनमें स्कूलवार छात्र संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यालय में मौजूद सुविधाएं, स्कूल बंद किए जाने का कारण, संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या और बंद विद्यालय के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध कराए गए निकटतम वैकल्पिक स्कूल की दूरी शामिल है।
पार्टी का कहना है कि इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन परिस्थितियों में विद्यालय बंद किए गए और वहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किस प्रकार की गई।
10 दिन में शिक्षा रोडमैप जारी करने की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से 10 दिनों के भीतर उत्तराखंड के लिए शिक्षा का विस्तृत रोडमैप जारी करने की मांग भी की है। पार्टी के मुताबिक इस रोडमैप में जिलेवार स्तर पर शिक्षक, पेयजल, शौचालय, सुरक्षित भवन, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने की समयसीमा तय की जानी चाहिए।
इसके साथ ही पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। पार्टी ने विशेष रूप से स्कूल बस, मिनी बस अथवा नियमित परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को विद्यालय पहुंचने में परेशानी न हो।
जवाब नहीं मिला तो शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
श्रेष्ठ सिंह ने कहा कि यदि 826 बंद सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार ने 10 दिनों के भीतर कोई स्पष्ट जवाब या रिपोर्ट जारी नहीं की, तो पार्टी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग भी उठा सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल स्कूल बंद किए जाने की जानकारी देने के बजाय प्रत्येक विद्यालय से संबंधित कारण और बच्चों के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी सार्वजनिक करनी चाहिए।
प्रदेशभर में लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि 10 दिन की समयसीमा के भीतर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब और स्पष्ट कार्रवाई का रोडमैप जारी नहीं किया गया तो प्रदेशभर में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
पार्टी का कहना है कि ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के जरिए सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में बंद सरकारी स्कूलों, शिक्षकों की कमी और विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के सामने 10 दिन की समयसीमा रखते हुए 826 बंद स्कूलों की विस्तृत रिपोर्ट और शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट रोडमैप जारी करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या जवाब देती है और 2 अक्टूबर के बाद प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।


