दिनांक: 22 सितंबर 2026
स्थान: देहरादून/चंपावत
उत्तराखंड सरकार की अगली मंत्रिमंडल बैठक इस बार देहरादून सचिवालय के बजाय चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित होने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह जनपद और विधानसभा क्षेत्र चंपावत में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित होने के कारण इसे खास महत्व दिया जा रहा है। बैठक को लेकर शासन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
4 अक्टूबर को सुबह 11 बजे होगी बैठक
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार धामी कैबिनेट की बैठक 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में होगी। बैठक को लेकर सचिवालय और संबंधित विभागों की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
देहरादून से बाहर मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित करने की सरकार की परंपरा के तहत इस बार चंपावत जिले को चुना गया है। बैठक के लिए विभिन्न विभागों से प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं और उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।
कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर हो सकता है फैसला
कैबिनेट बैठक में प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन समेत विभिन्न विभागों के प्रस्ताव बैठक में रखे जा सकते हैं।
इनमें नीतिगत फैसलों के साथ विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े विषय शामिल होने की संभावना है। हालांकि बैठक के एजेंडे को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन प्रस्तावों पर मंत्रिमंडल की मुहर लगेगी।
चंपावत में बैठक का अपना अलग महत्व
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चंपावत विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनके गृह जनपद में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित किए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चंपावत उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का सीमावर्ती जिला है। भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित होने से स्थानीय स्तर के मुद्दों और विकास से जुड़े विषयों को सरकार के सामने रखने का अवसर भी मिलेगा।
देहरादून से बाहर कैबिनेट बैठक की पुरानी परंपरा
उत्तराखंड सरकार समय-समय पर देहरादून से बाहर भी मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित करती रही है। इसका उद्देश्य केवल शासन स्तर की बैठक को दूसरे जिले में आयोजित करना नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय जरूरतों को भी नीतिगत चर्चा का हिस्सा बनाना रहा है।
इस तरह की बैठकों में संबंधित क्षेत्रों की विकास योजनाओं की समीक्षा के साथ स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा और निर्णय लिए जा सकते हैं।
हरिद्वार से गैरसैंण तक हो चुकी हैं बैठकें
राज्य में देहरादून से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित करने का सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 2010 में तत्कालीन निशंक सरकार ने हरिद्वार की हरकी पैड़ी में गंगा प्रदूषण के खिलाफ अभियान के दौरान कैबिनेट बैठक की थी।
इसके बाद वर्ष 2012 में विजय बहुगुणा सरकार के कार्यकाल में चमोली जिले के गैरसैंण में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित हुई थी। बाद में भराड़ीसैंण, गैरसैंण में विधानसभा भवन बनने के बाद यहां कैबिनेट बैठकों के साथ विधानसभा सत्र और बजट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सरकारी गतिविधियां भी आयोजित होती रही हैं।
दूसरे जिलों में भी बढ़ सकती है ऐसी बैठकों की पहल
4 अक्टूबर को बनबसा में प्रस्तावित कैबिनेट बैठक को सरकार की देहरादून से बाहर शासन को ले जाने की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है। बैठक के दौरान चंपावत समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
निष्कर्ष:
बनबसा में होने वाली यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार मुख्यमंत्री धामी के गृह जनपद चंपावत में राज्य मंत्रिमंडल एक साथ बैठक करेगा। अब सबकी नजर 4 अक्टूबर की बैठक पर रहेगी कि सरकार किन प्रस्तावों पर निर्णय लेती है और चंपावत समेत प्रदेश के विकास से जुड़े किन मुद्दों को कैबिनेट के एजेंडे में जगह मिलती है।


