देहरादून, उत्तराखंड | 17 अक्टूबर 2026
दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने इस नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए नियुक्ति पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश की जनता के मन में इस फैसले को लेकर निराशा और आक्रोश है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस मुद्दे सहित प्रदेश के विभिन्न जनहित के सवालों को लेकर राज्यभर में आंदोलन करेगी।
हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में मीडिया से बातचीत के दौरान सैलजा ने कहा कि उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पेपर लीक और भूमि माफिया जैसे गंभीर मुद्दे अब भी बने हुए हैं। उनके मुताबिक, सरकार इन समस्याओं का समाधान करने में सफल नहीं रही है।
अंकिता भंडारी मामले का जिक्र कर नियुक्ति पर उठाए सवाल
कुमारी सैलजा ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तक अंकिता के परिवार को पूरा न्याय नहीं मिलता, कांग्रेस इस मामले में अपना संघर्ष जारी रखेगी।
उन्होंने मामले में कथित तौर पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और एक वीआईपी की भूमिका को लेकर उठे सवालों का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की। सैलजा ने आरोप लगाया कि मामले की जांच और संबंधित सवालों पर स्पष्टता आने से पहले नियुक्ति का फैसला उत्तराखंड की महिलाओं और बेटियों की भावनाओं का अपमान है।
ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। नियुक्ति को लेकर उठाए गए सवालों और हत्याकांड से संबंधित दावों पर संबंधित जांच एवं आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे से लेकर महिला सुरक्षा तक सरकार को घेरा
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने भाजपा पर धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
सैलजा ने प्रदेश में महिला सुरक्षा की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने रेखा आर्या से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि एक मंत्री को भी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने इस प्रकरण को केवल घरेलू विवाद तक सीमित मानने के बजाय व्यापक जवाबदेही से जोड़कर देखने की बात कही।
बेरोजगारी, पेपर लीक और पलायन पर भी कांग्रेस का हमला
सैलजा ने कहा कि उत्तराखंड के कई गांवों से लगातार पलायन हो रहा है और अनेक गांव लगभग खाली हो चुके हैं। उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने खनन और भूमि माफिया से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के लोगों को रोजगार, पारदर्शी व्यवस्था और सुरक्षित माहौल की जरूरत है। कांग्रेस इन विषयों को जनता के बीच ले जाकर सरकार से जवाब मांगेगी।
इसके अलावा, उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को लेकर पार्टी की आपत्तियां भी दोहराईं। उनके अनुसार, कांग्रेस इन मुद्दों को राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी उठा रही है।
कांग्रेस ने घोषित किया आंदोलन का कार्यक्रम
प्रदेश सरकार और केंद्र के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज करते हुए कांग्रेस ने आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की है। पार्टी के मुताबिक, आंदोलन की रूपरेखा इस प्रकार है:
- 22 से 25 अक्टूबर 2026: न्याय यात्रा
- 27 अक्टूबर 2026: विधानसभा घेराव
- 1 नवंबर 2026: दिल्ली में विशाल रैली
- 4 नवंबर 2026: उत्तराखंडभर में धरना-प्रदर्शन
कांग्रेस का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए अंकिता भंडारी हत्याकांड, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, भुवन कापड़ी, ज्योति रौतेला, सुजाता पॉल, धीरेंद्र प्रताप और नवीन जोशी सहित पार्टी के कई नेता मौजूद रहे।
नेताओं ने राज्य के विभिन्न मुद्दों पर पार्टी के रुख का समर्थन करते हुए आंदोलन को व्यापक बनाने की बात कही।
निष्कर्ष: दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले ने उत्तराखंड में राजनीतिक बहस तेज कर दी है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर की शुरुआत तक कई आंदोलनात्मक कार्यक्रम घोषित किए हैं। अब देखना होगा कि इन मुद्दों पर राज्य और केंद्र सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।


