पिथौरागढ़, उत्तराखंड | 17 अक्टूबर 2026
पिथौरागढ़ में नाबालिग रिश्तेदार किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने पीड़िता को राज्य सरकार की ओर से नियमानुसार एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
12 मई 2025 को किशोरी को बहला-फुसलाकर ले गया था आरोपी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषी मूल रूप से नेपाल का निवासी है और घटना के समय पिथौरागढ़ जिले में रह रहा था। 12 मई 2025 को वह अपनी 14 वर्षीय नाबालिग रिश्तेदार को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। किशोरी के अचानक लापता होने के बाद परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन शुरुआती दिनों में उसका कोई सुराग नहीं मिला।
इसके बाद 26 मई 2025 को किशोरी के संबंध में जानकारी मिलने पर परिजनों ने कोतवाली पिथौरागढ़ में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और नाबालिग को बरामद करने के साथ आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में दाखिल किया आरोप-पत्र
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद आवश्यक साक्ष्य जुटाए और आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया। इसके बाद प्रकरण की सुनवाई विशेष सत्र न्यायालय (पॉक्सो) में हुई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए। साथ ही न्यायालय के समक्ष विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए।
नौ गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) प्रेम सिंह भंडारी ने मामले की प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया।
विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।
पीड़िता को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश
सजा सुनाने के साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को पीड़िता को नियमानुसार एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष: पिथौरागढ़ के इस मामले में न्यायालय के फैसले ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों में दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत कठोर सजा दी जा सकती है। आरोपी को 20 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाने के साथ पीड़िता के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता के निर्देश भी दिए गए हैं।


