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मोहब्बेवाला में लगातार सड़क हादसों से दहशत, किराएदार छोड़ रहे मकान; कहीं दैवीय प्रकोप तो कहीं सड़क की बनावट पर उठ रहे सवाल

दिनांक: 18 अक्टूबर 2026 | स्थान: मोहब्बेवाला–आशारोड़ी, देहरादून, उत्तराखंड

देहरादून के मोहब्बेवाला क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेज रफ्तार और ओवरलोड ट्रकों के अनियंत्रित होने की घटनाओं के बीच अब लोगों में सड़क सुरक्षा को लेकर डर के साथ-साथ तरह-तरह की धारणाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोग हादसों को सड़क की ढलान, वाहनों की तकनीकी स्थिति और ओवरलोडिंग से जोड़ रहे हैं, तो कुछ स्थानीय निवासी इन्हें दैवीय प्रकोप या अदृश्य शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं।

हादसों का असर अब केवल सड़क पर चलने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। सड़क किनारे रहने वाले परिवारों और दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई किराएदार मकान खाली कर दूसरी जगह जा रहे हैं, जबकि नए किराएदार भी यहां रहने से कतरा रहे हैं। इससे मकान मालिकों और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान की आशंका भी सताने लगी है।

मोहब्बेवाला–आशारोड़ी मार्ग पर क्यों बढ़ रही है लोगों की चिंता?

मोहब्बेवाला से आशारोड़ी चेक पोस्ट तक के मार्ग पर पिछले कुछ समय से लगातार दुर्घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेज रफ्तार ट्रक, भारी सामान से लदे वाहन और ढलान वाले हिस्सों में वाहनों के नियंत्रण से बाहर होने की घटनाएं चिंता का कारण बनी हुई हैं।

कुछ मामलों में अनियंत्रित वाहन सड़क किनारे खड़े वाहनों, दुकानों और आवासीय भवनों के नजदीक तक पहुंच गए। ऐसे घटनाक्रमों ने सड़क के आसपास रहने वाले लोगों को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कुछ व्यवस्थाओं में बदलाव किए जाने के बाद भी दुर्घटनाओं का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा है। इसी वजह से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।

हादसों के बीच अंधविश्वास को भी मिल रही जगह

लगातार दुर्घटनाओं से परेशान कुछ स्थानीय लोग घटनाओं को धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले एक पीपल का पेड़ था, जिसे काट दिया गया। कुछ लोगों का विश्वास है कि इसके बाद हादसों में बढ़ोतरी हुई है।

स्थानीय स्तर पर पीपल का पेड़ दोबारा लगाने और काल भैरव मंदिर की स्थापना करने की मांग भी उठ रही है। कुछ लोग इसे क्षेत्र की धार्मिक आस्था और शांति से जोड़कर देखते हैं।

हालांकि, इन धारणाओं की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाण सामने नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सड़क की बनावट, ढलान, वाहनों की गति, ब्रेक की स्थिति, ओवरलोडिंग और यातायात प्रबंधन जैसे पहलुओं की जांच जरूरी है।

किराएदारों ने छोड़े मकान, नए लोग भी रहने से कर रहे परहेज

लगातार हादसों का सबसे सीधा असर सड़क किनारे बने मकानों में रहने वाले परिवारों पर पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कुछ किराएदार सुरक्षा की चिंता के चलते मकान छोड़कर दूसरी जगह जा चुके हैं। वहीं, नए किराएदार भी इस क्षेत्र में मकान लेने से पहले कई बार सोच रहे हैं।

इस स्थिति से मकान मालिकों की आमदनी प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि आशारोड़ी चेक पोस्ट से सटी कॉलोनियों में प्लॉट देखने आने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है।

किराए पर रहने वाले परिवारों के लिए दूसरी जगह जाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन वर्षों से यहां रह रहे परिवारों और पुश्तैनी मकानों के मालिकों के लिए स्थान बदलना बड़ी चुनौती है। ऐसे लोग एक ओर अपनी जमीन और घर से जुड़े हैं, तो दूसरी ओर परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

दुकानदारों को भी सता रहा हादसे का डर

स्थानीय दुकानदार रजनी के मुताबिक, क्षेत्र में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण लोगों में भय बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में रात के समय एक ट्रक उनकी दुकान के सामने लगे बोर्ड से टकरा गया। इस घटना के बाद उन्हें आशंका सताने लगी कि कहीं कोई भारी वाहन अनियंत्रित होकर दुकान या मकान को नुकसान न पहुंचा दे।

रजनी का कहना है कि सड़क किनारे रहने वाले किराएदारों को मकान का किराया देने के साथ-साथ अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता झेलनी पड़ रही है। स्थानीय दुकानदारों के लिए भी यह स्थिति परेशानी का कारण बनी हुई है।

पीपल का पेड़ लगाने और मंदिर बनाने की मांग

स्थानीय निवासी कुलदीप शर्मा का कहना है कि जिस स्थान पर पहले पीपल का पेड़ था, उसे काटे जाने के बाद से दुर्घटनाएं होने लगीं। उन्होंने अपनी गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने का जिक्र करते हुए उस स्थान पर दोबारा पीपल का पेड़ लगाने और मंदिर स्थापित करने की जरूरत बताई।

इसी तरह स्थानीय निवासी और दुकानदार सुजीत कुमार ने भी पीपल का पेड़ काटे जाने और मां डाट काली मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर लोगों की आवाजाही कम होने का उल्लेख किया। उनका मानना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस स्थान पर फिर से लोगों की आवाजाही बढ़नी चाहिए।

हालांकि, पेड़ काटे जाने या धार्मिक गतिविधियों में बदलाव और सड़क दुर्घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में हादसों को रोकने के लिए वैज्ञानिक जांच और प्रभावी सड़क सुरक्षा उपायों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

स्कूटी चलाने से भी डर रहे लोग, एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल

स्थानीय निवासी डॉ. संजीवनी ने बताया कि इस मार्ग पर भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही को लेकर लोगों में चिंता है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं के डर से अब वह पहले की तरह स्कूटी से आने-जाने में सहज महसूस नहीं करतीं। उन्हें आशंका रहती है कि पीछे से कोई तेज रफ्तार वाहन टक्कर न मार दे।

स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने दुर्घटना होने पर एंबुलेंस की उपलब्धता और पुलिस के मौके पर पहुंचने में लगने वाले समय को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि हादसों की आशंका वाले इस क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।

स्थानीय निवासी उमेश पुरोहित ने सड़क की बनावट में आवश्यक बदलाव करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, मार्ग का ढलान और भारी सामान से लदे ट्रकों की आवाजाही दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है। उन्होंने काल भैरव मंदिर स्थापित करने की मांग का भी उल्लेख किया।

परिवहन विभाग ने शुरू किए सर्वे और सुरक्षा उपाय

मोहब्बेवाला–आशारोड़ी मार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग की ओर से सर्वे और सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं। इसी क्रम में देहरादून की आरटीओ (प्रवर्तन) अनीता चमोला ने मार्ग का निरीक्षण किया।

उन्होंने बताया कि आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों को तैनात करने की व्यवस्था की जाएगी। यहां वाहनों की जांच की जाएगी और भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाएगी।

विभाग की ओर से यह भी देखा जाएगा कि ट्रक, अन्य भारी वाहन और ट्रैक्टर-ट्रॉली एक-दूसरे के बीच पर्याप्त दूरी बनाकर चल रहे हैं या नहीं। इस मार्ग पर नियमित रूप से वाहन चलाने वाले चालकों से भी बातचीत की जाएगी, ताकि सड़क पर वाहन चलाते समय आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को समझा जा सके।

नए वाहन चालकों को भी जागरूक करने की योजना है। इसके साथ ही सड़क के बीच लगाए गए जिगजैग बैरिकेड्स के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। यदि इनसे यातायात और सुरक्षा में सुधार देखने को मिलता है, तो व्यवस्था को आगे भी जारी रखने पर विचार किया जाएगा।

हादसों पर रोक के लिए क्या जरूरी?

मोहब्बेवाला में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने सड़क सुरक्षा, स्थानीय आवासीय क्षेत्रों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाना जरूरी है।

इसमें सड़क के ढलान और डिजाइन की जांच, भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण, ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई, ब्रेक और वाहन की फिटनेस की जांच, पर्याप्त चेतावनी संकेत, प्रभावी बैरिकेडिंग तथा समय पर एंबुलेंस और पुलिस सहायता उपलब्ध कराना शामिल है।

निष्कर्ष: आस्था के साथ सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

मोहब्बेवाला–आशारोड़ी मार्ग पर लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। कुछ लोग इन घटनाओं को दैवीय प्रकोप से जोड़ रहे हैं, जबकि अन्य सड़क की ढलान, भारी वाहनों और यातायात व्यवस्था में खामियों को जिम्मेदार मानते हैं।

फिलहाल, हादसों के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच से ही हो सकती है। परिवहन विभाग की ओर से किए जा रहे सर्वे और सुरक्षा उपायों का असर जमीन पर दिखाई देना जरूरी है। साथ ही, स्थानीय लोगों की शिकायतों पर ध्यान देते हुए दुर्घटना संभावित स्थानों को सुरक्षित बनाना, आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करना और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी रखना समय की मांग है।

जब तक सड़क सुरक्षा के इंतजाम भरोसेमंद नहीं बनते, तब तक यहां रहने वाले परिवारों, दुकानदारों और राहगीरों की चिंता दूर करना चुनौती बना रहेगा।

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