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उत्तराखंड में बच्चों पर वायरल संक्रमण का बढ़ता असर, हैंड-फुट-माउथ डिजीज के मामले आए सामने; जानें लक्षण और बचाव के तरीके

देहरादून, 27 अक्टूबर 2026

 उत्तराखंड में मौसम में बदलाव के साथ बच्चों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। देहरादून के अस्पतालों में बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इसी बीच कुछ बच्चों में हैंड-फुट-माउथ डिजीज (HFMD) के मामले भी सामने आए हैं। बाल रोग विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है।

दून मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंच रहे संक्रमित बच्चे

दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक के अनुसार, इन दिनों वायरल संक्रमण से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए ओपीडी पहुंच रहे हैं। इनमें हैंड-फुट-माउथ डिजीज से प्रभावित तीन से चार मामले भी सामने आ रहे हैं।

हैंड-फुट-माउथ डिजीज एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। स्कूल और अन्य सामूहिक गतिविधियों के दौरान बच्चों में इसका संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने से घर के अन्य बच्चों तक भी यह बीमारी पहुंच सकती है।

मुंह, हथेलियों और पैरों पर दाने दिखें तो रहें सावधान

विशेषज्ञों के मुताबिक, हैंड-फुट-माउथ डिजीज होने पर बच्चे के मुंह के अंदर छाले या घाव, हथेलियों और पैरों के तलवों पर लाल दाने तथा त्वचा पर चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चों को बुखार, गले में दर्द और खाने-पीने में परेशानी भी हो सकती है।

यदि बच्चे में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो अभिभावकों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाकर जांच और उचित चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। खासकर तब, जब बच्चा पर्याप्त पानी नहीं पी पा रहा हो या उसकी तबीयत लगातार बिगड़ रही हो।

संक्रमण से बचाने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

डॉक्टरों ने बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। अभिभावक इन उपायों को अपनाकर बीमारी के फैलाव का खतरा कम कर सकते हैं:

  • बच्चों को साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें।
  • संक्रमित बच्चे को स्कूल या अन्य सामूहिक गतिविधियों में भेजने से बचें और स्कूल लौटने के संबंध में चिकित्सक की सलाह लें।
  • बच्चों को पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार दें।
  • खिलौनों, दरवाजों के हैंडल और बार-बार छुई जाने वाली सतहों की नियमित सफाई करें।
  • संक्रमित बच्चे के बर्तन, तौलिया और अन्य निजी सामान साझा न करें।
  • बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न दें।

बदलते मौसम में बच्चों की सेहत पर दें विशेष ध्यान

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों में विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमण देखने को मिल सकते हैं। छोटे बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उनकी स्वच्छता, खानपान और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित टीकाकरण भी समय पर कराना चाहिए, हालांकि हैंड-फुट-माउथ डिजीज से बचाव के लिए फिलहाल कोई नियमित टीका उपलब्ध नहीं है।

यदि बच्चा सुस्त पड़ने लगे, पानी पीना कम कर दे, पेशाब कम आए या तेज बुखार बना रहे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

डॉक्टरों की अभिभावकों से अपील

दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लें। समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने, स्वच्छता बनाए रखने और संक्रमण की स्थिति में उचित सावधानी बरतने से बीमारी को दूसरे बच्चों तक फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष: बदलते मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता जरूरी है। बुखार, मुंह में छाले या हाथ-पैरों पर लाल दाने दिखाई देने पर खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाएं।

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