देहरादून | 6 नवंबर 2026
दीपावली के त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दबाजी में देहरादून रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गुरुवार को पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में जगह पाने के लिए यात्रियों के बीच जबरदस्त मारामारी देखने को मिली। हालात ऐसे हो गए कि प्लेटफार्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। सबसे ज्यादा अव्यवस्था राप्ती गंगा एक्सप्रेस के पहुंचने पर देखने को मिली, जहां जनरल कोच में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
ट्रेनों में पहले से ही क्षमता से अधिक यात्री मौजूद थे। इसके बावजूद लोग किसी तरह डिब्बों में प्रवेश करने की कोशिश करते रहे। कुछ समय के लिए स्टेशन पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। स्थिति बिगड़ती देख जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला और भीड़ को नियंत्रित करने में जुट गए।
दोपहर से ही प्लेटफार्म पर बढ़ने लगा था दबाव
गुरुवार दोपहर से ही देहरादून रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। पूर्वांचल और बिहार जाने वाले लोग ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे।
दोपहर करीब 12:45 बजे सूबेदारगंज जाने वाली लिंक एक्सप्रेस स्टेशन पहुंची। ट्रेन में सवार होने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीब डेढ़ बजे ट्रेन रवाना हुई, लेकिन इसके बाद भी प्लेटफार्म पर भीड़ कम नहीं हुई।
दोपहर 2:17 बजे जैसे ही राप्ती गंगा एक्सप्रेस स्टेशन पहुंची, यात्रियों का दबाव और बढ़ गया। ट्रेन रुकते ही सीट हासिल करने की होड़ में लोग एक साथ कोचों की तरफ दौड़ पड़े।
जनरल कोच में जगह नहीं, दरवाजों पर भी लगी भीड़
राप्ती गंगा एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे पहले से ही खचाखच भरे हुए थे। अंदर न बैठने की जगह बची थी और न ही ठीक से खड़े होने की। इसके बावजूद बड़ी संख्या में यात्री डिब्बों में घुसने की कोशिश करते रहे।
भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि कोच के दरवाजों पर भी यात्रियों का जमावड़ा लग गया। ऐसे में किसी यात्री के गिरने या भीड़ के नीचे दबने का खतरा पैदा हो गया। धक्का-मुक्की के बीच कुछ देर के लिए हालात बेकाबू होते नजर आए।
महिला और बच्चियों को सुरक्षित ट्रेन तक पहुंचाया
स्टेशन पर मची अफरातफरी के बीच महिला यात्रियों और बालिकाओं को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। भारी भीड़ के कारण उनके लिए कोच तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा था।
ऐसे समय में जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने सक्रियता दिखाई। जवानों ने महिलाओं और बच्चियों को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकालकर ट्रेन के डिब्बों तक पहुंचाया और उन्हें सवार होने में मदद की।
पुलिसकर्मियों की तत्परता से स्थिति को संभालने में मदद मिली और संभावित हादसे को टालने का प्रयास किया गया।
हर साल त्योहारों पर सामने आती है यही परेशानी
दीपावली और छठ पूजा के दौरान उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल और बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या में हर साल भारी बढ़ोतरी होती है। देहरादून में बड़ी संख्या में काम करने वाले लोग त्योहार मनाने के लिए अपने घरों का रुख करते हैं।
रेलवे के लिए यह स्थिति नई नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों की संख्या के अनुपात में व्यवस्थाएं पर्याप्त नजर नहीं आतीं। लंबी दूरी की ट्रेनों में जनरल कोचों पर अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे यात्रियों को असुरक्षित परिस्थितियों में सफर करना पड़ता है।
अतिरिक्त ट्रेनों और कोचों की व्यवस्था पर उठे सवाल
त्योहारों के दौरान हर साल यात्रियों की भीड़ बढ़ने के बावजूद पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों का दबाव पहले से मालूम होने के बावजूद अतिरिक्त कोच, विशेष ट्रेनों और प्लेटफार्म पर भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
ट्रेनों में क्षमता से अधिक यात्रियों का सवार होना केवल असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि इससे किसी बड़े हादसे की आशंका भी बनी रहती है।
निष्कर्ष
दीपावली पर देहरादून रेलवे स्टेशन में देखने को मिली भीड़ ने एक बार फिर त्योहारों के दौरान रेल व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राप्ती गंगा एक्सप्रेस में चढ़ने को लेकर हुई धक्का-मुक्की ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। जीआरपी और आरपीएफ की सक्रियता से हालात संभालने में मदद मिली, लेकिन हर साल दोहराई जाने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। रेलवे को त्योहारों के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों, कोचों और प्रभावी भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीरता से काम करना होगा।


