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यूसीसी का असर: उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण को लेकर आई ऐतिहासिक जागरूकता, 24 गुना तक बढ़े आंकड़े

देहरादून | 12 जनवरी 2026

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू होने के बाद उत्तराखंड में सामाजिक बदलाव की स्पष्ट तस्वीर सामने आने लगी है। राज्य में विवाह पंजीकरण को लेकर लोगों की जागरूकता में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की संख्या में लगभग 24 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है, जो इसे देश में एक मिसाल बनाती है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता को विधिवत लागू किया गया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान यूसीसी को लागू करने का संकल्प लिया गया था, जिसे सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही स्वीकृति प्रदान कर ऐतिहासिक निर्णय लिया।


सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं, व्यापक जनमत संग्रह और विशेषज्ञों की सिफारिशों के बाद 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया। इसके बाद से राज्य में विवाह पंजीकरण को लेकर जनमानस में जागरूकता तेजी से बढ़ी है।


यूसीसी को सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों—विशेष रूप से महिलाओं—को समान अधिकार और सम्मान देना है।


इस कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप सहित पारिवारिक मामलों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया है। इसमें महिला और पुरुष दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु तय की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक और अन्य पारिवारिक प्रक्रियाओं के लिए सख्त और पारदर्शी प्रावधान किए गए हैं। यूसीसी के लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह, हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक मात्र छह माह की अवधि में राज्य में तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण दर्ज किए गए। जबकि पुराने विवाह पंजीकरण अधिनियम (वर्ष 2010) के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल लगभग 3.30 लाख पंजीकरण ही हो पाए थे।


यदि प्रतिदिन के औसत की बात करें, तो पुराने कानून के अंतर्गत जहां प्रतिदिन मात्र 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। यह आंकड़े स्वयं इस कानून की स्वीकार्यता और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का एक ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान प्रदान करना है।


मुख्यमंत्री ने कहा, “विवाह पंजीकरण में आई अभूतपूर्व वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को खुले दिल से स्वीकार किया है और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देखा है। उत्तराखंड ने पूरे देश को एक नई दिशा दी है और आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाएंगे।”


निष्कर्ष

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का प्रभाव केवल कानूनी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है। विवाह पंजीकरण में रिकॉर्ड वृद्धि यह प्रमाणित करती है कि यूसीसी ने जनता के विश्वास को मजबूत किया है। उत्तराखंड का यह मॉडल आने वाले वर्षों में देशभर में सामाजिक समानता और न्याय की नई राह प्रशस्त कर सकता है।

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