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महिला आयोग आपके द्वार: हरिद्वार में जनसुनवाई, महिला चिकित्सकों का 21 महीने का वेतन रोकने पर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस

अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की सख्त चेतावनी — आयोग के निर्देशों की अनदेखी हुई तो होगी कड़ी कार्रवाई

हरिद्वार | बुधवार, 11 मार्च 2026

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महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान को प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने ‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के तहत बुधवार को हरिद्वार में जनसुनवाई आयोजित की। जिलाधिकारी सभागार में आयोजित इस जनसुनवाई की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की। कार्यक्रम में आयोग की सदस्य विमला नैथानी और कमला जोशी भी मौजूद रहीं।

जनसुनवाई के दौरान कुल 18 पीड़ित महिलाओं और फरियादियों ने अपनी समस्याएं आयोग के सामने रखीं। इनमें से कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि चार गंभीर मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय देहरादून भेजा गया।

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21 महीने से वेतन न मिलने पर महिला चिकित्सकों की शिकायत

जनसुनवाई के दौरान हरिद्वार के एक निजी अस्पताल (मेट्रो हॉस्पिटल) में कार्यरत दो महिला चिकित्सकों ने आयोग के समक्ष गंभीर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पिछले एक वर्ष नौ महीने से उनका वेतन रोका गया है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अस्पताल प्रबंधन को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि वे 16 मार्च को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। साथ ही निर्देश दिया गया कि एक सप्ताह के भीतर दोनों महिला चिकित्सकों का पूरा बकाया वेतन चेक के माध्यम से भुगतान किया जाए।

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दहेज उत्पीड़न और अवैध संबंधों के मामले में जांच के आदेश

जनसुनवाई में एक महिला ने अपने पति पर अवैध संबंध और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया। इस पर अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए और दोनों पक्षों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए तलब किया।

इसके अलावा एक अनपढ़ विधवा महिला ने अपने जेठ पर संपत्ति हड़पने और उसे उसके हिस्से से वंचित करने का आरोप लगाया। इस मामले में आयोग की अध्यक्ष ने जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए कि पीड़िता को उसके हिस्से की संपत्ति का कब्जा दिलाने के लिए उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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निर्धन महिलाओं की आजीविका का मुद्दा भी उठा

जनसुनवाई में मनसा देवी मंदिर मार्ग पर दुकान हटाए जाने से प्रभावित महिलाओं का मुद्दा भी सामने आया। इन महिलाओं की आजीविका प्रभावित होने पर अध्यक्ष ने नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार को निर्देश दिए कि प्रभावित महिलाओं को जीवन-यापन के लिए किसी उचित स्थान पर दुकान उपलब्ध कराई जाए।

इसके अतिरिक्त आयोग ने एक पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। वहीं सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण के लिए संबंधित नोडल अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई करने को कहा गया।

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आयोग के निर्देशों को हल्के में न लें अधिकारी

जनसुनवाई के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि महिला आयोग के निर्देशों को कोई भी विभाग हल्के में न ले। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि आयोग से संबंधित मामलों में समयबद्ध तरीके से जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी को अपने विभाग की आईसीसी (Internal Complaints Committee) की जांच से संतुष्टि नहीं है तो मामले की निष्पक्ष पुनः जांच कराई जाए। साथ ही सभी विभागों को अपने कार्यालयों में पॉश (POSH) कानून से संबंधित कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए।

कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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वन स्टॉप सेंटर की समीक्षा में सामने आए सकारात्मक परिणाम

जनसुनवाई के दौरान वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। सेंटर की प्रशासिका ने बताया कि इस वर्ष दर्ज 490 मामलों में से 488 मामलों का सफल निस्तारण किया जा चुका है, जो महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक उपलब्धि है।

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ये अधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई में मुख्य विकास अधिकारी एल.एन. मिश्रा, एसपी क्राइम निशा यादव, सदस्य सचिव महिला आयोग उर्वशी चौहान, परियोजना निदेशक नलनीत घिल्डियाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी एन.के. हल्दियानी, पुलिस क्षेत्राधिकारी एस.पी. बलूनी, जिला विकास अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदोरिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मवीर सिंह, विधि अधिकारी दयाराम सिंह और लेबर इंस्पेक्टर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

इसके साथ ही महिला आयोग अध्यक्ष के निजी सचिव आधार वर्मा और वन, पर्यटन, विद्युत सहित अन्य विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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निष्कर्ष

‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान के माध्यम से राज्य महिला आयोग ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं तक सीधे पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहा है। हरिद्वार में आयोजित यह जनसुनवाई न केवल महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, बल्कि प्रशासनिक तंत्र को भी महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति अधिक संवेदनशील बनने का स्पष्ट संदेश दे गई।

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