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देहरादून में वीरता की मिसाल—कैप्टन प्रशांत चौरसिया ने साथी को बचाया, खुद दी शहादत

देहरादून | 25 मार्च 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने साहस, कर्तव्य और बलिदान की नई मिसाल पेश कर दी। भैरव बटालियन की घातक प्लाटून प्रतियोगिता के दौरान कैप्टन प्रशांत चौरसिया ने अपने साथी जवान की जान बचाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर निवासी कैप्टन प्रशांत चौरसिया 20 मार्च को आयोजित इस कठिन सैन्य प्रतियोगिता में अपनी टीम के साथ हिस्सा ले रहे थे। प्रतियोगिता के तहत जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नदी पार करनी थी।

इसी दौरान एक जवान अचानक नदी की तेज धारा में फंस गया और उसकी जान पर बन आई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कैप्टन चौरसिया ने बिना एक पल गंवाए नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना साथी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

हालांकि, इस बहादुरी के दौरान कैप्टन चौरसिया पानी के भीतर एक पत्थर से टकरा गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल देहरादून स्थित मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया।

कई घंटों तक चले उपचार के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। इस घटना ने सेना के साथ-साथ पूरे देश को गमगीन कर दिया है।

सैन्य अधिकारियों ने कैप्टन चौरसिया को एक निडर, कर्तव्यनिष्ठ और साहसी अधिकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अंतिम क्षण तक ‘घातक’ भावना को जीवित रखा। उनका यह बलिदान सेना की सर्वोच्च परंपराओं का प्रतीक है।

परिवार की बात करें तो कैप्टन प्रशांत चौरसिया अपने माता-पिता की तीन संतानों में मंझले थे। उनकी बड़ी बहन सलोनी का विवाह हाल ही में हुआ है, जबकि छोटे भाई मयंक चौरसिया परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, कैप्टन चौरसिया की वीरता न केवल उनकी यूनिट बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनका यह बलिदान यह संदेश देता है कि सच्चा सैनिक वही होता है, जो देश और साथियों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटता।

निष्कर्ष:
कैप्टन प्रशांत चौरसिया का बलिदान देशभक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि असली हीरो वही होते हैं, जो दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं करते। उनकी वीरता और बलिदान हमेशा देशवासियों के दिलों में अमर रहेंगे।

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