देहरादून में परिवहन विभाग के उप निरीक्षक निलंबित, वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल
देहरादून | 13 मई 2026
देहरादून के हर्रावाला क्षेत्र में परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब बाइक स्क्वायड में तैनात परिवहन उप निरीक्षक Shashikant Tengowal का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में ट्रांसपोर्टरों द्वारा उन पर कथित अवैध वसूली और लेनदेन के आरोप लगाए जाते दिखाई दे रहे हैं।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद परिवहन विभाग ने उप निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि घटना के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और प्रवर्तन तंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
‘रस मलाई’ खाने पहुंचे और दुकान में हो गए बंद
जानकारी के मुताबिक सोमवार को परिवहन विभाग की बाइक स्क्वायड टीम हर्रावाला क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान उप निरीक्षक शशिकांत तेंगोवाल कथित तौर पर एक दुकान पर पहुंचे।
आरोप है कि ट्रांसपोर्टरों ने उन्हें “रस मलाई” खाने के बहाने दुकान के अंदर बुलाया और फिर बाहर से शटर बंद कर दिया। करीब दो घंटे तक वह दुकान के अंदर ही फंसे रहे, जबकि बाहर ट्रांसपोर्टरों की भीड़ जमा रही।
इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और विभाग में हड़कंप मच गया।
वायरल वीडियो में लगे गंभीर आरोप
वायरल वीडियो में कुछ ट्रांसपोर्टर परिवहन विभाग के अधिकारियों पर कथित वसूली और लेनदेन के आरोप लगाते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी।
घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर एक प्रवर्तन अधिकारी ऐसी परिस्थिति में दुकान के भीतर क्यों मौजूद था और ट्रांसपोर्टरों में इतना आक्रोश क्यों दिखाई दिया।
विभाग की सफाई भी चर्चा में
सूत्रों के अनुसार उप निरीक्षक ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सफाई देते हुए कहा कि वह केवल रस मलाई खाने दुकान पर गए थे। हालांकि इस सफाई के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ है।
Anita Chamola ने कहा कि उप निरीक्षक ड्यूटी समाप्त होने के बाद दुकान में गया था और वायरल वीडियो में किसी प्रकार का नगद लेनदेन दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है।
हरिद्वार में भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
यह पहला मामला नहीं है जब परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम पर सवाल उठे हों। करीब डेढ़ वर्ष पहले Haridwar में भी बाइक स्क्वायड से जुड़े एक कर्मचारी पर कथित वसूली के आरोप लगे थे।
उस समय विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए फील्ड में तैनात कर्मचारियों के लिए बॉडी वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने की बात कही थी, ताकि हर कार्रवाई रिकॉर्ड हो सके। लेकिन अब नए विवाद के बाद फिर सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित अधिकारी के पास कैमरा था या नहीं, और यदि था तो उसकी फुटेज कहां है।
आउटर क्षेत्रों में कार्रवाई पर भी उठे सवाल
इस पूरे विवाद के बीच परिवहन विभाग की चेकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का आरोप है कि शहर के भीतर तो सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन बाहरी इलाकों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन होता रहता है।
प्रेमनगर, रायपुर और राजपुर जैसे क्षेत्रों में प्रतिबंधित समय के दौरान भी भारी वाहन और खनन सामग्री से भरे डंपर बेरोकटोक चलते दिखाई देते हैं। कारोबारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि जहां “सेटिंग” नहीं होती, वहां कार्रवाई ज्यादा होती है।
निलंबन के बाद भी खत्म नहीं हुए सवाल
उप निरीक्षक शशिकांत तेंगोवाल के निलंबन के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई का संदेश देने की कोशिश जरूर की है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे प्रवर्तन सिस्टम की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित है या फिर सड़क पर चेकिंग के नाम पर लंबे समय से चल रहे कथित वसूली नेटवर्क की एक झलक भर है।
घटना ने परिवहन विभाग की पारदर्शिता, निगरानी व्यवस्था और फील्ड में होने वाली कार्रवाई पर गंभीर बहस छेड़ दी है। प्रशासनिक स्तर पर अब इस पूरे मामले की जांच पर सभी की नजर टिकी हुई है।


