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NEET पेपर लीक पर कांग्रेस का बड़ा हमला, धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग

देहरादून में बोले आलोक शर्मा – “NEET परीक्षा नहीं, निलामी बन चुकी है व्यवस्था”

देहरादून, उत्तराखंड | 14 मई 2026

देशभर में चर्चा का विषय बने नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को देहरादून स्थित उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की गिरफ्त में आ चुकी है।

उन्होंने कहा कि NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा अब छात्रों की मेहनत नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और कथित मिलीभगत का प्रतीक बनती जा रही है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई है।


“फेल शिक्षा मंत्री हैं धर्मेंद्र प्रधान” – कांग्रेस

प्रेस वार्ता के दौरान आलोक शर्मा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “फेल शिक्षा मंत्री” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आने के बावजूद केंद्र सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।


NTA की भूमिका पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। आलोक शर्मा ने कहा कि NTA एक ऐसी संस्था है, जिसकी विश्वसनीयता लगातार सवालों के घेरे में रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में गठित इस एजेंसी में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों का प्रभाव रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस एजेंसी को इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर के एग्जाम कराने की अनुमति किस स्तर से दी गई।

कांग्रेस ने पूछा कि क्या NTA को मानव संसाधन मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय या फिर केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी से अधिक शक्तियां दी गईं।


कांग्रेस की प्रमुख मांगें

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने कई अहम मांगें भी रखीं। पार्टी ने कहा कि:

  • नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल भंग किया जाए।
  • एजेंसी का फॉरेंसिक और फाइनेंशियल ऑडिट कराया जाए।
  • NEET पेपर लीक मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से कराई जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच हो।
  • जांच तय समयसीमा के भीतर पूरी की जाए।

इसके अलावा कांग्रेस ने मांग की कि यदि छात्रों का दोबारा परीक्षा आयोजन होता है, तो वह परीक्षा NTA के बजाय CBSE, UPSC या किसी अन्य विश्वसनीय संस्था के माध्यम से कराई जाए।


री-एग्जाम देने वाले छात्रों को मुआवजे की मांग

कांग्रेस ने उन छात्रों के लिए आर्थिक सहायता की भी मांग उठाई, जिन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है। आलोक शर्मा ने कहा कि री-एग्जाम में शामिल होने वाले प्रत्येक छात्र को केंद्र सरकार कम से कम 10 हजार रुपये का मुआवजा दे।

उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और असुरक्षा की स्थिति से गुजर रहे हैं। कई परिवारों ने बच्चों की तैयारी के लिए भारी खर्च किया है और पेपर लीक की घटनाओं ने उनकी मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


“देश में डॉक्टर बन रहे हैं या नकल माफिया?” – कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार पर युवाओं का भविष्य बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब देश को यह सोचना होगा कि क्या योग्य छात्र डॉक्टर बन रहे हैं या फिर नकल और पेपर लीक के जरिए गलत लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं लाई गई, तो देश की प्रतियोगी परीक्षाओं पर से युवाओं का भरोसा पूरी तरह खत्म हो सकता है।


निष्कर्ष

NEET पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकारी एजेंसियों की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी स्तर पर और अधिक गरमाने की संभावना जताई जा रही है।

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