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उत्तराखंड में ‘राजस्व लोक अदालत’ की शुरुआत: CM धामी बोले—अब लंबित मामलों का होगा त्वरित निपटारा

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 28 मार्च 2026


उत्तराखंड में वर्षों से लंबित राजस्व विवादों के समाधान के लिए एक बड़ी पहल की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘राजस्व लोक अदालत’ का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाते हुए आम जनता को समयबद्ध न्याय दिलाना है।


मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि आम नागरिकों को बिना देरी के न्याय मिले। उन्होंने इसे न्याय सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को आगे बढ़ाती है।


50 हजार से अधिक लंबित मामलों के समाधान की पहल
प्रदेश में वर्तमान में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय संचालित हैं, जहां करीब 50 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। इन मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए सरकार ने ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि’ के मूल मंत्र के साथ इस अभिनव योजना को लागू किया है।


13 जिलों में 210 स्थानों पर एक साथ आयोजन
‘न्याय आपके द्वार’ की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदेश के सभी 13 जनपदों में 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान लगभग 6,933 मामलों के त्वरित निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।


भूमि विवाद से लेकर कई अधिनियमों के मामलों का निपटारा
इस लोक अदालत के माध्यम से केवल भूमि विवाद ही नहीं, बल्कि आबकारी, खाद्य, स्टांप, सरफेसी एक्ट, गुंडा एक्ट, सीआरपीसी, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम और रेंट कंट्रोल एक्ट से जुड़े मामलों का भी समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाएगा।


डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को ऑनलाइन करने के लिए ‘Revenue Court Case Management System’ पोर्टल विकसित किया गया है। इसके जरिए नागरिक घर बैठे अपने मामलों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और प्रकरण दर्ज कर सकते हैं।


अधिकारियों को सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अविवादित विरासत मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के बाद तय समय सीमा के भीतर नामांतरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मृतक की तेहरवीं या पीपलपानी तक वारिसों के नाम खतौनी जारी कर दी जाए। साथ ही, विवादित भूमि की पैमाइश और कब्जे से जुड़े मामलों को एक महीने के भीतर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए।


प्रशासन ने तेज़ी से निपटान का भरोसा दिलाया
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप राजस्व मामलों का निस्तारण युद्ध स्तर पर किया जाएगा। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को एक महीने के भीतर लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। इस दौरान राजस्व सचिव रंजना राजगुरु भी बैठक में मौजूद रहीं।


निष्कर्ष:
‘राजस्व लोक अदालत’ उत्तराखंड में न्याय प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हो सकती है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल वर्षों से लंबित मामलों को कम करेगा, बल्कि आम जनता के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी मजबूत करेगा।

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