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उत्तराखंड में वन्यजीवों का बढ़ता खतरा: तड़म गांव में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ, गौला बैराज में CCTV में बाघ की दहशत

स्थान: हल्द्वानी / अल्मोड़ा
तारीख: 19 अप्रैल 2026

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। गौला बैराज क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी और तड़म गांव में तेंदुए के आतंक ने स्थानीय लोगों की चिंता और दहशत दोनों बढ़ा दी है।


CCTV में कैद हुआ बाघ, इलाके में दहशत

16 अप्रैल की रात गौला बैराज कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरों में एक बाघ साफ तौर पर नजर आया। फुटेज में बाघ एक कुत्ते को अपने जबड़े में दबाकर ले जाता दिखा। इस घटना के बाद क्षेत्र में भय का माहौल बन गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी जंगली जानवर की मौजूदगी यहां देखी गई हो। इससे पहले भी कई बार गुलदार (तेंदुआ) की गतिविधियां सामने आ चुकी हैं। बीते महीनों में कई पालतू जानवरों को शिकार बनाए जाने की घटनाओं ने पहले ही लोगों को डरा रखा था, अब बाघ की मौजूदगी ने खतरे को और गंभीर बना दिया है।


वन विभाग सतर्क, लगाए जाएंगे ट्रैप कैमरे

लोगों ने वन विभाग से बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। इस मामले में वन विभाग के अधिकारी नितिन पंत ने बताया कि जिस क्षेत्र में बाघ की मूवमेंट देखी गई है, वहां ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे और निगरानी बढ़ाई जाएगी।


तड़म गांव में पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ

वहीं, अल्मोड़ा जिले के तड़म गांव में पिछले कई महीनों से तेंदुए का आतंक बना हुआ था। वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में शनिवार को एक तेंदुआ कैद हो गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू कर अल्मोड़ा स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया।


पहले भी हो चुकी हैं जानलेवा घटनाएं

तड़म गांव और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए के हमले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। कुछ समय पहले तेंदुए ने गांव के एक बुजुर्ग खीम सिंह पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। इसके अलावा खोल्यो क्यारी गांव में भी एक बुजुर्ग महिला को तेंदुए ने अपना शिकार बना लिया था। इन घटनाओं के बाद से ग्रामीणों में लगातार भय बना हुआ है।


निष्कर्ष:
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीवों का आबादी की ओर बढ़ता रुख गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक ओर जहां वन विभाग लगातार निगरानी और बचाव के प्रयास कर रहा है, वहीं स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में घटते संसाधन और बढ़ती मानव गतिविधियां इस संघर्ष की प्रमुख वजह बन रही हैं, जिस पर ठोस रणनीति बनाना बेहद जरूरी है।

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