स्थान: देहरादून
तारीख: 19 अप्रैल 2026
देहरादून में आयोजित ईपीएफ-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति उत्तराखंड इकाई की बैठक में न्यूनतम पेंशन ₹7500 और महंगाई भत्ते की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।
सरकार पर सामाजिक सुरक्षा में विफलता का आरोप
बैठक में पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे आंदोलन की समीक्षा करते हुए केंद्र सरकार पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा देने में विफल रहने का आरोप लगाया।
उत्तर भारत समन्वयक सुरेश डंगवाल ने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई वार्ता में स्पष्ट किया गया है कि श्रम मंत्रालय से प्रस्ताव मिलने के बाद ही न्यूनतम पेंशन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
देशभर में 72 लाख पेंशनर्स की मांग
समिति के सचिव बीएस रावत ने कहा कि देशभर में करीब 72 लाख ईपीएफ पेंशनर्स लंबे समय से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक सुरक्षा के नाम पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है।
संसद में प्रस्ताव लाने की मांग
बैठक में वक्ताओं ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए संसद के विशेष सत्र में न्यूनतम पेंशन से संबंधित प्रस्ताव पारित कराने की मांग उठाई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जिलाध्यक्ष राकेश पेटवाल ने हाल ही में ईपीएफओ कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों का आभार जताया और आगामी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो उत्तराखंड में सेवानिवृत्त कर्मचारी आगामी चुनावों में बड़ा फैसला लेने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष:
EPF-95 पेंशनर्स की लंबे समय से चली आ रही मांग अब एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। न्यूनतम पेंशन ₹7500 और महंगाई भत्ते को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर अहम बन सकता है।


