स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 20 अप्रैल 2026
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे खुलने के बाद जहां यात्रा सुगम हुई है, वहीं मसूरी जाने वाले मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। खासतौर पर मसूरी रोड के कुठालगेट क्षेत्र में जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। सिंगल लेन बेली ब्रिज के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन आशारोड़ी तक तेज गति से पहुंच रहे हैं, लेकिन शहर में प्रवेश करते ही ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो जाती है। कुठालगेट क्षेत्र में सिंगल लेन बेली ब्रिज bottleneck बन गया है, जिससे वाहनों को रेंगते हुए गुजरना पड़ रहा है और जाम की स्थिति पैदा हो रही है।
दरअसल, 15 सितंबर 2025 की मध्य रात्रि को हुई भारी बारिश से कुठालगेट का पुराना पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था। तत्काल समाधान के तौर पर लोक निर्माण विभाग ने दो से तीन दिनों के भीतर अस्थायी बेली ब्रिज तैयार कर दिया था, लेकिन यह सिंगल लेन होने के कारण पर्याप्त नहीं साबित हो रहा है।
पर्यटन सीजन शुरू होने और एक्सप्रेसवे से वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद इस बेली ब्रिज पर दबाव काफी बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि देहरादून से मसूरी पहुंचने में दो से तीन घंटे या उससे भी अधिक समय लग रहा है।
समस्या को लेकर भाजपा नेता रविंद्र जुगरान ने लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडे से मुलाकात कर समाधान की मांग उठाई। इसके बाद विभागीय अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए।
लोक निर्माण विभाग ने समाधान के तौर पर मौजूदा बेली ब्रिज के बगल में एक और बेली ब्रिज बनाने का निर्णय लिया है। लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार के अनुसार नए बेली ब्रिज का निर्माण शुरू कर दिया गया है और चार दिनों के भीतर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि नया पुल करीब 40 मीटर लंबा होगा। इसके तैयार होने के बाद वाहनों के आवागमन के लिए अतिरिक्त लेन मिल जाएगी, जिससे जाम की समस्या में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही विभाग ने स्थायी समाधान पर भी काम शुरू कर दिया है। क्षतिग्रस्त पुल की जगह लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से नया डबल लेन पक्का पुल बनाया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि दीपावली से पहले यह पुल तैयार कर लिया जाएगा।
नया पुल बनने के बाद मसूरी रोड पर मौजूद एक खतरनाक मोड़ भी समाप्त हो जाएगा, जिससे यातायात और अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
निष्कर्ष:
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बाद बढ़े ट्रैफिक ने मसूरी रोड की कमजोर कड़ी को उजागर कर दिया है। फिलहाल दूसरा बेली ब्रिज राहत देगा, जबकि डबल लेन स्थायी पुल बनने के बाद यात्रियों को लंबे समय तक जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद है।


