स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 26 अप्रैल 2026
देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस हेवेनली फुटहिल्स कॉलोनी में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब कॉलोनीवासियों का गुस्सा बिल्डर के खिलाफ सड़कों पर फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर भी संरक्षण देने का आरोप लगाया।
करीब 80 से अधिक कॉलोनीवासियों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर छह घंटे तक मौन धरना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कॉलोनी में लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है, जिससे लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।
आरोप है कि हाल ही में डीआरडीओ में तैनात एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के साथ बिल्डर द्वारा मारपीट की गई, जिसमें उनका कान गंभीर रूप से घायल हो गया। इतना ही नहीं, उनकी पत्नी, जो स्वयं वैज्ञानिक हैं, और बुजुर्ग पिता के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। घटना के बावजूद पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी है।
कॉलोनीवासियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके मुताबिक, बिल्डर के खिलाफ पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन हर बार पुलिस हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले को दबा देती है। इससे आरोपी के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं और कॉलोनी में रहने वाले लोगों के बीच डर का माहौल बन गया है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर लंबे समय से सरकारी जमीन पर कब्जा, अवैध निर्माण, मारपीट और धमकी जैसे मामलों में लिप्त रहा है। विरोध करने वाले लोगों के खिलाफ उल्टे क्रॉस केस दर्ज करवा दिए जाते हैं, जिससे आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
मामले को और गंभीर बनाते हुए कॉलोनीवासियों ने बताया कि दीपावली के दौरान बच्चों को डराने के लिए पिस्टल दिखाने जैसी घटना भी सामने आई थी। इसके अलावा सोसाइटी अध्यक्ष के साथ भी मारपीट, गालीगलौज और तेज रफ्तार कार से टक्कर मारने की कोशिश जैसे आरोप लगाए गए हैं।
लोगों का कहना है कि वैज्ञानिक परिवार के साथ हुई ताजा घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। उनका आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद यदि पुलिस सख्त कार्रवाई नहीं करती, तो कानून व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
निष्कर्ष:
एटीएस कॉलोनी का यह मामला अब कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।


