स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 4 मई 2026
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में भी कार्यकर्ताओं ने अनोखे अंदाज में जीत का जश्न मनाया। यहां मिठाई की जगह बंगाल की पारंपरिक झालमुड़ी बांटकर एक-दूसरे को बधाई दी गई।
CM धामी के पहुंचते ही बढ़ा उत्साह, कार्यकर्ताओं को खिलाई झालमुड़ी
जैसे ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भाजपा मुख्यालय पहुंचने की सूचना मिली, वहां कार्यकर्ताओं और नेताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही माहौल और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया।
मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही झालमुड़ी ली और अपने हाथों से कार्यकर्ताओं और नेताओं को खिलाकर जीत की खुशी साझा की। इसके बाद पार्टी पदाधिकारियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान बंगाली समुदाय की महिलाएं भी पारंपरिक परिधान में मौजूद रहीं, जिससे माहौल में सांस्कृतिक रंग और भी गहरा हो गया।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में जश्न, गीत-संगीत पर थिरके कार्यकर्ता
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री खजान दास सहित कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मुख्यालय पहुंचे।
जश्न के दौरान कार्यकर्ता रंगों में सराबोर नजर आए और ढोल-नगाड़ों व गीत-संगीत के बीच जमकर नाचे। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
नेताओं ने जीत को बताया ऐतिहासिक, कार्यकर्ताओं की मेहनत को दिया श्रेय
भाजपा के संगठन महामंत्री अजय ने कहा कि यह जीत देश में एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों में कठिन परिस्थितियों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत की, जिसका परिणाम आज सामने आया है।
प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने झालमुड़ी के साथ जश्न मनाने को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि यह जीत ऐतिहासिक है और प्रदेश में परिवर्तन का प्रतीक है।
वहीं, प्रदेश महामंत्री दीप्ति भारद्वाज ने कहा कि यह जीत केवल एक राजनीतिक विजय नहीं, बल्कि सुशासन और जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण का परिणाम बताया।
निष्कर्ष
देहरादून में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मनाया गया यह जश्न न सिर्फ राजनीतिक सफलता का प्रतीक था, बल्कि इसमें सांस्कृतिक एकता और उत्साह भी साफ झलकता नजर आया। झालमुड़ी के साथ मनाया गया यह अनोखा जश्न यह दर्शाता है कि जीत की खुशी को स्थानीय परंपराओं से जोड़कर और भी खास बनाया जा सकता है।



