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आंधी-तूफान के बाद टिहरी झील के फ्लोटिंग हट्स पर सख्ती, सेफ्टी ऑडिट के लिए 5 सदस्यीय कमेटी गठित

दिनांक: 3 मई 2026 | स्थान: टिहरी, उत्तराखंड

टिहरी झील में बने फ्लोटिंग हट्स को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में आए तेज आंधी-तूफान से हुए नुकसान के बाद अब इन हट्स का विस्तृत सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। इसके लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ जांच समिति का गठन किया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने तक फ्लोटिंग हट्स का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।


बीती शाम तेज आंधी और तूफान ने टिहरी झील क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया। झील के बीच स्थित फ्लोटिंग हट्स की जेटी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पूरी संरचना दो हिस्सों में बंट गई। उस समय वहां ठहरे करीब 30 पर्यटक अचानक संकट में फंस गए।


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोटी कॉलोनी में तैनात एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इस त्वरित कार्रवाई के चलते एक बड़ा हादसा टल गया।


घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन भी हरकत में आया। प्रभारी जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने क्षतिग्रस्त जेटी और फ्लोटिंग हट्स की स्थिति का निरीक्षण करते हुए सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।


प्रशासन ने एसडीएम कमलेश मेहता के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है। इस समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हैं, जो फ्लोटिंग हट्स की संरचनात्मक मजबूती, सुरक्षा मानकों और आपदा से निपटने की तैयारियों का गहन परीक्षण करेंगे।


कमेटी में एसडीएम टिहरी कमलेश मेहता, तहसीलदार धीरज राणा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी सोबत सिंह राणा, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार, और क्षेत्राधिकारी चंद्र मोहन सिंह समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी।


प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट नहीं आ जाती और सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक फ्लोटिंग हट्स को दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


गौरतलब है कि हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में आंधी-बारिश के दौरान एक क्रूज पलटने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। टिहरी में भी परिस्थितियां कुछ ऐसी ही बनी थीं, लेकिन समय रहते एसडीआरएफ की सक्रियता ने किसी भी प्रकार की जनहानि होने से बचा लिया।


निष्कर्ष

टिहरी झील की यह घटना पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अहमियत को उजागर करती है। प्राकृतिक आपदाओं के बीच लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। प्रशासन द्वारा सेफ्टी ऑडिट का फैसला एक जरूरी और सराहनीय कदम है, जो भविष्य में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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