देहरादून | 2 मई 2026
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। देहरादून स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित भव्य सदस्यता कार्यक्रम में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को प्रदेश की राजनीति में बड़ी सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वालों में लक्ष्मी राणा (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष), मीना शर्मा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महिला कांग्रेस व पूर्व चेयरमैन, रुद्रपुर नगर पालिका), दर्शन लाल आर्य (पूर्व विधायक प्रत्याशी, घनसाली) सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली।
कार्यक्रम के दौरान महेंद्र भट्ट ने सभी नए सदस्यों को पार्टी का पटका पहनाकर स्वागत किया और फूल मालाओं के साथ उनका अभिनंदन किया गया। भाजपा मुख्यालय में सुबह से ही भारी चहल-पहल देखने को मिली, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे।
भाजपा ने सदस्यता अभियान को लेकर विशेष तैयारियां की हैं और इसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस अभियान को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इसे लेकर खासा उत्साह व्यक्त किया।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान के जरिए भाजपा सरकार और संगठन के कार्यों को भी आम जनता तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि भाजपा में शामिल हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस जनता को गुमराह करने का काम करती है, जिसका परिणाम उसे चुनावों में भुगतना पड़ता है।
महेंद्र भट्ट ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में कांग्रेस के और भी कई बड़े नेता भाजपा में शामिल होंगे और इसके लिए उनके पास लंबी सूची तैयार है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
निष्कर्ष:
देहरादून में हुए इस सदस्यता कार्यक्रम ने उत्तराखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस से भाजपा में नेताओं का लगातार शामिल होना चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने का संकेत दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सियासी उठापटक का चुनावी परिणामों पर कितना असर पड़ता है।


