देहरादून | 2 मई 2026
उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों, सेविकाओं और मिनी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रेखा नेगी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ संपन्न हुई, जिसमें कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी।
बैठक में संगठन द्वारा पूर्व में सौंपे गए मांग पत्र पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों के मानदेय में 140 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दे दिए हैं।
इसके अलावा, केंद्र सरकार से 150 रुपये प्रतिदिन की अतिरिक्त बढ़ोतरी को लेकर भी चर्चा हुई। विभागीय सचिव चंद्रेश यादव ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है और इस पर निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।
बैठक में एक महत्वपूर्ण आश्वासन यह भी दिया गया कि आंगनबाड़ी कर्मचारियों की सहमति के बिना 300 रुपये की किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। साथ ही, धरने पर बैठी कार्यकर्तियों का मानदेय भी नहीं काटा जाएगा, जिस पर विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट सहमति जताई।
सरकार और संगठन के बीच वार्ता के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों ने अपना धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। इस दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, चीफ कोऑर्डिनेटर इंद्रजीत सिंह कडाकोटी, कार्मिक सचिव शैलेश बगौली, सचिव चंद्रेश यादव, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास बंशीलाल राणा, राज्य परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी और नोडल अधिकारी नीतू फ्लोरा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इसके साथ ही संगठन की ओर से श्रीमती पुष्पा सजवान, श्रीमती सोनी, श्रीमती बसंती रावत, श्रीमती रितेश चौहान, श्रीमती पिंकी सिंह, सुश्री उर्मिला तोमर, श्रीमती सुमित्रा, श्रीमती चंद्रावती, श्रीमती प्रीति विद्यार्थी, श्रीमती दीपा थापा, श्रीमती पुष्पा नेगी और श्रीमती सुनीता राणा समेत कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
आंगनबाड़ी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सरकार के सकारात्मक रुख से बड़ा समाधान निकलता नजर आ रहा है। मानदेय वृद्धि और अन्य आश्वासनों के बाद धरना स्थगित होना इस बात का संकेत है कि संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव है। अब सभी की नजरें इन घोषणाओं के धरातल पर लागू होने पर टिकी हैं।


