स्थान: विकासनगर, देहरादून (उत्तराखंड)
तारीख: 4 मई 2026
देहरादून जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार को विकासनगर स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में औचक छापेमारी की। जिलाधिकारी सविन बंसल की इस कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
छापेमारी में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को कई गंभीर अनियमितताएं देखने को मिलीं। जांच में वर्ष 2018, 2024 और 2025 के मूल विलेख पत्र (Original Deed Registers) संदिग्ध स्थिति में पाए गए। इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तत्काल कब्जे में लेकर जब्त कर लिया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री की गई है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस खुलासे ने पूरे विभाग में हलचल मचा दी है।
स्टांप शुल्क चोरी के 47 मामले चिन्हित
निरीक्षण के दौरान धारा 47-ए के अंतर्गत स्टांप शुल्क की चोरी से जुड़े 47 मामलों की पहचान की गई है। इसे वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला माना जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इन मामलों में नियमानुसार सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कार्यालय संचालन में पारदर्शिता की कमी उजागर
जांच में यह भी सामने आया कि कार्यालय में अभिलेखों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही थी। प्रक्रियात्मक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
जिला प्रशासन इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच कर रहा है और एक समग्र रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
DM के सख्त निर्देश, दोषियों पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी सविन बंसल ने निर्देश दिए हैं कि वर्तमान और पूर्व में तैनात सभी सब-रजिस्ट्रार के कार्यकाल की गतिविधियों की गहन जांच की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति
जिला प्रशासन ने दोहराया है कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
निष्कर्ष
विकासनगर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में हुई इस छापेमारी ने प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजागर कर दिया है। यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती से नकेल कसी जाएगी।


