देहरादून | 9 मई 2026
उत्तराखंड के चंपावत में सामने आए कथित नाबालिग सामूहिक दुष्कर्म मामले ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल खड़ा कर दिया है। मामले में नया मोड़ आने के बाद कांग्रेस ने धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस जांच और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक मामला पहुंचा दिया है।
कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र भेजकर पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सत्ताधारी दल से जुड़े एक नेता का नाम सामने आने के बाद पूरे प्रकरण को अलग दिशा देने की कोशिश की जा रही है, जिससे पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डॉ. प्रतिमा सिंह ने अपने पत्र में कहा कि यदि पुलिस यह दावा कर रही है कि मामला साजिश का हिस्सा था और कोई घटना नहीं हुई, तो फिर एफआईआर में दर्ज तथ्यों, मेडिकल रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान क्या कहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच पूरी होने और न्यायालय में ट्रायल शुरू होने से पहले पुलिस किस आधार पर निष्कर्ष सार्वजनिक कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कथित पीड़िता का 70 वर्षीय दिव्यांग पिता गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर है। ऐसे में परिवार पर साजिश रचने के आरोप कई सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस ने पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
इधर कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने भी सरकार पर मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में नाबालिग के साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ, तो यह राहत की बात है, लेकिन जिस तरह पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बयान दिए जा रहे हैं और 164 के तहत बयान की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं, उससे मामले में संदेह पैदा हो रहा है।
धीरेंद्र प्रताप ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले में राज्यपाल से भी समय मांगा है। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में महिलाओं से जुड़े मामलों में पीड़ितों को पूर्ण न्याय मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि हिमालयी राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में उत्तराखंड चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है। साथ ही आरोप लगाया कि महिलाओं से जुड़े कई चर्चित मामलों में सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं अब यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनता जा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है, जबकि प्रशासन और पुलिस अपनी जांच प्रक्रिया को सही ठहरा रहे हैं।
निष्कर्ष
चंपावत का कथित नाबालिग गैंगरेप मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर संवेदनशील बन चुका है। कांग्रेस द्वारा मानवाधिकार आयोग से न्यायिक जांच की मांग और सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएगी।


