पांच वर्षों में 275 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य, पर्वतीय कृषि को मिलेगा नया आधार
देहरादून | 13 मई 2026
उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सुधार और बिखरी जोतों को व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में “पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति 2026” को मंजूरी दे दी गई। सरकार का मानना है कि यह नीति पर्वतीय किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ कृषि उत्पादन को भी नई दिशा देगी।
बिखरी जमीनों को एकीकृत करने पर सरकार का फोकस
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में खेती की सबसे बड़ी समस्या छोटी और बिखरी हुई जोतें रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित कृषि भूमि के कारण किसानों को खेती में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। नई नीति का उद्देश्य ऐसी बिखरी कृषि भूमि को एकीकृत कर खेती को अधिक लाभकारी और व्यवस्थित बनाना है।
सरकार का कहना है कि चकबंदी के जरिए कृषि, बागवानी और सह कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
हर साल 55 गांवों में होगा चकबंदी कार्य
नई नीति के तहत प्रदेश के 11 पर्वतीय जिलों में प्रत्येक वर्ष हर जिले के 5 गांवों का चयन किया जाएगा। इस तरह हर साल कुल 55 गांवों में चकबंदी कार्य पूरा किया जाएगा। सरकार ने आगामी पांच वर्षों में 275 गांवों को स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी योजना से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है।
चकबंदी के लिए उन्हीं गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां किसी प्रकार का भू-विवाद न हो। इसके अलावा चयनित क्षेत्र का न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर होना अनिवार्य रखा गया है।
25 खाताधारकों की सहमति जरूरी
यदि किसी क्षेत्र का कुल भूमि क्षेत्रफल निर्धारित मानक से कम होता है, तो वहां कम से कम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। नीति के अनुसार भू-स्वामी आपसी सहमति से चक निर्माण की योजना तैयार करेंगे और उसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक होगी और किसानों की सहमति के आधार पर ही लागू की जाएगी।
किसानों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन
नीति के तहत चकबंदी पूरी होने के बाद किसानों और खाताधारकों को विशेष प्रोत्साहन और लाभ दिए जाएंगे। इससे किसानों को आधुनिक खेती अपनाने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपना आवेदन बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) या सहायक कलेक्टर (परगनाधिकारी) के समक्ष जमा कर सकेंगे।
पारदर्शिता के लिए बनेगी निगरानी समितियां
नीति के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए राज्य स्तर पर उच्चाधिकार समिति (HPC), राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा जिला स्तर पर क्रियान्वयन समितियों का गठन किया जाएगा।
सरकार ने यह भी तय किया है कि नीति लागू होने के तीन वर्षों बाद उसके अनुभवों और सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि इसे और प्रभावी बनाया जा सके।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में चकबंदी नीति खेती को नई दिशा दे सकती है। वर्तमान में वन क्षेत्र और वन्यजीव विविधता अधिक होने के कारण कृषि योग्य भूमि सीमित है। ऐसे में छोटी-बिखरी जोतों का एकीकरण किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत घटेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में यह नीति एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


