देहरादून, 19 मई 2026
उत्तराखंड की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनकी पहचान केवल सत्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके फैसलों ने शासन व्यवस्था की दिशा ही बदल दी। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) उन्हीं नेताओं में शामिल हैं, जिनका कार्यकाल आज भी पारदर्शिता, ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक निर्णयों के लिए याद किया जाता है।
अपने कार्यकाल के दौरान जनरल खंडूड़ी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और जनता को बेहतर शासन देने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक फैसले लिए। यही वजह है कि उनका नाम आज भी उत्तराखंड की राजनीति में सुशासन के प्रतीक के रूप में लिया जाता है।
लोकायुक्त कानून से देशभर में बनाई पहचान
वर्ष 2011 में खंडूड़ी सरकार ने देश का सबसे सख्त लोकायुक्त विधेयक पारित कर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय यह कानून भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े कदम के रूप में देखा गया।
इस कानून के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक समेत आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को भी शामिल किया गया था। खास बात यह रही कि समाजसेवी अन्ना हजारे की टीम ने भी उत्तराखंड के इस लोकायुक्त मॉडल को आदर्श बताया था।
खंडूड़ी सरकार का यह कदम उस दौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का उदाहरण माना गया।
बेनामी संपत्ति और भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार
जनरल खंडूड़ी ने सत्ता संभालते ही प्रशासनिक भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सदाचार नीति लागू करते हुए मंत्रियों और अधिकारियों के लिए अपनी चल-अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया।
उनका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता बढ़ाना और जनता के बीच विश्वास कायम करना था। इसी के साथ ट्रांसफर उद्योग पर भी अंकुश लगाने के प्रयास शुरू किए गए।
तबादला नीति में लाई पारदर्शिता
उत्तराखंड में लंबे समय से सिफारिशी तबादलों को लेकर सवाल उठते रहे थे। खंडूड़ी सरकार ने इस व्यवस्था को सुधारने के लिए पारदर्शी तबादला नीति लागू की।
बाद में यही नीति मजबूत ट्रांसफर एक्ट की नींव बनी। इस फैसले को सरकारी व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की दिशा में अहम कदम माना गया।
भू-कानून में बदलाव कर बचाई पहाड़ की जमीन
जनरल खंडूड़ी के कार्यकाल का सबसे चर्चित निर्णयों में से एक भू-कानून में संशोधन भी रहा। वर्ष 2008 में उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम में बदलाव कर बाहरी लोगों द्वारा खरीदी जा सकने वाली कृषि भूमि की सीमा 500 वर्ग मीटर से घटाकर 250 वर्ग मीटर कर दी।
इस निर्णय का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि भूमि को बचाना और अनियंत्रित प्लॉटिंग पर रोक लगाना था। साथ ही पहाड़ों की जनसांख्यिकी और सांस्कृतिक संतुलन को बनाए रखने की कोशिश भी इस फैसले के पीछे मानी गई।
सेवा का अधिकार कानून से आमजन को राहत
सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों और आम लोगों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए खंडूड़ी सरकार सेवा का अधिकार कानून लेकर आई।
इसके तहत जाति प्रमाणपत्र, मूल निवास, आय प्रमाणपत्र और राशन कार्ड जैसी जरूरी सेवाओं को तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया।
यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा देरी की जाती थी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया। इस कानून को आम जनता के लिए बड़ी राहत माना गया।
पहाड़ में उद्योग बढ़ाने की पहल
खंडूड़ी सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हिल इंडस्ट्रियल पॉलिसी लागू की। इस नीति के तहत पहाड़ों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष रियायतें और प्रोत्साहन दिए गए।
सरकार का उद्देश्य था कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित हों और युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। इस नीति के बाद कई छोटे उद्योगों की स्थापना का रास्ता आसान हुआ।
राजनीतिक सादगी और अनुशासन की मिसाल
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी को उनकी सादगी, अनुशासन और साफ-सुथरी राजनीति के लिए भी जाना जाता है। सेना की पृष्ठभूमि से आने वाले खंडूड़ी ने प्रशासनिक कार्यशैली में भी अनुशासन और जवाबदेही को प्राथमिकता दी।
उनके कई फैसले उस समय राजनीतिक रूप से कठिन माने गए, लेकिन उन्होंने जनहित को प्राथमिकता देते हुए सख्त कदम उठाने से पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना।
निष्कर्ष
उत्तराखंड की राजनीति में मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का कार्यकाल आज भी सुशासन और पारदर्शिता के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। लोकायुक्त कानून, भू-कानून में संशोधन, सेवा का अधिकार और पारदर्शी प्रशासन जैसे फैसलों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
उनकी नीतियां केवल राजनीतिक घोषणाएं नहीं थीं, बल्कि शासन व्यवस्था में सुधार की गंभीर कोशिशों के रूप में देखी गईं। यही कारण है कि जनरल खंडूड़ी आज भी उत्तराखंड के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने फैसलों से जनता के दिलों में स्थायी जगह बनाई।


