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देहरादून में मौसम बदलते ही बीमारियों का बढ़ा प्रकोप, दून अस्पताल में उमड़े मरीज; डेंगू-चिकनगुनिया के 16 नए मामले

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड | दिनांक: 13 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। बुखार, सर्दी-जुकाम और बदन दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को कुल 2,711 मरीजों ने ओपीडी में परामर्श लिया। इनमें सबसे अधिक 501 मरीज मेडिसिन विभाग में पहुंचे। वहीं, जिले में डेंगू और चिकनगुनिया के 16 नए मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ गई है।

दून अस्पताल की ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन विभाग में

मौसम के उतार-चढ़ाव का असर लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ रही। मेडिसिन विभाग में आने वाले मरीजों में बुखार, जुकाम और शरीर में अकड़न जैसी शिकायतें प्रमुख रहीं।

चिकित्सकों के अनुसार, मेडिसिन ओपीडी में पहुंचने वाले लगभग 10 में से चार मरीज ऐसे लक्षणों से परेशान हैं। अस्पताल के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विवेकानंद सत्यवाली ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

सोमवार को विभिन्न विभागों में मरीजों की स्थिति इस प्रकार रही:

  • मेडिसिन विभाग में 501 मरीज पहुंचे।
  • हड्डी रोग विभाग में 240 मरीजों ने परामर्श लिया।
  • स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (गायनी) में 232 मरीज पहुंचे।
  • त्वचा रोग विभाग में 231 मरीजों की ओपीडी रही।
  • ईएनटी विभाग में 191 मरीज पहुंचे।
  • बाल रोग विभाग में 184 मरीजों ने उपचार लिया।
  • सर्जरी विभाग में 145 मरीज पहुंचे।
  • यूरोलॉजी विभाग में 122 मरीजों ने परामर्श लिया।
  • नेत्र रोग विभाग में 105 मरीज पहुंचे।
  • दंत रोग विभाग में 80 मरीजों की ओपीडी रही।

चिकित्सकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने लोगों को बदलते मौसम में अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई बनाए रखना और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है।

बुखार, सर्दी-जुकाम या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके।

डेंगू के 9 और चिकनगुनिया के 7 नए मरीज मिले

वायरल संक्रमण के साथ ही जिले में मच्छरजनित बीमारियों के मामले भी सामने आ रहे हैं। सोमवार को डेंगू के नौ और चिकनगुनिया के सात नए मरीज मिले। इस तरह एक ही दिन में दोनों बीमारियों के कुल 16 नए मामले दर्ज किए गए।

स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अब तक डेंगू के 314 और चिकनगुनिया के 203 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, डेंगू से संक्रमित 13 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।

डेंगू की जांच के लिए सोमवार को 471 सैंपल लिए गए, जिनमें नौ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। नए मरीजों में तीन देहरादून और छह अन्य जिलों के निवासी बताए गए हैं।

डेंगू के लिए अब तक 40 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक डेंगू की जांच के लिए कुल 40,080 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें 314 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

कुल संक्रमित मरीजों में 152 देहरादून के निवासी हैं, जबकि 162 मरीज दूसरे जिलों से संबंधित हैं। राहत की बात यह है कि अब तक 301 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

हालांकि, अस्पतालों में भर्ती मरीजों और नए मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से निगरानी और बचाव संबंधी गतिविधियां जारी हैं।

घर-घर सर्वे में 56 मकानों में मिला डेंगू का लार्वा

डेंगू की रोकथाम के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। इसका उद्देश्य मच्छरों के पनपने वाले स्थानों की पहचान करना और संक्रमण फैलने की आशंका को कम करना है।

सोमवार को दोनों टीमों ने 7,201 घरों का सर्वे किया। इस दौरान 56 घरों में डेंगू का लार्वा पाया गया। टीमों ने कुल 50,584 कंटेनरों की जांच की, जिनमें से 64 में लार्वा मिला।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि घरों और आसपास जमा पानी की नियमित जांच करना जरूरी है। कूलर, गमले, पानी की टंकियों और अन्य बर्तनों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों को पनपने का मौका मिल सकता है।

निष्कर्ष

देहरादून में मौसम बदलने के साथ वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दून अस्पताल की ओपीडी में एक दिन में 2,711 मरीजों का पहुंचना और डेंगू-चिकनगुनिया के 16 नए मामले सामने आना स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को दर्शाता है। लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, आसपास पानी जमा नहीं होने देने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के लिए घर-घर सर्वे और मच्छरों के लार्वा की रोकथाम पर लगातार ध्यान देना महत्वपूर्ण रहेगा।

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