हरिद्वार, 15 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हरिद्वार स्थित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व के द्वार पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं। गुरुवार से यहां जंगल सफारी का नया सीजन शुरू हो गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अब पर्यटक 30 जून तक इस प्राकृतिक क्षेत्र में जंगल सफारी का आनंद उठा सकेंगे।
प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का अनोखा संसार
हरिद्वार-लालढांग मार्ग पर स्थित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व धीरे-धीरे उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की तर्ज पर यह क्षेत्र भी प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
यहां घने जंगलों, हरे-भरे घास के मैदानों और प्राकृतिक वातावरण के बीच वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिलता है। जंगल सफारी के दौरान पर्यटक हाथी, गुलदार, भालू, चीतल, हिरन और सांभर जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। कई बार यहां बाघ दिखाई देने की संभावना भी रहती है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों का रोमांच और बढ़ जाता है।
पिछले सीजन में पर्यटकों की संख्या ने बनाया रिकॉर्ड
झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा वन विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पिछले सीजन में यहां रिकॉर्ड 16,717 पर्यटकों ने जंगल सफारी की। इससे वन विभाग को 53,01,200 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इससे पहले के सीजन में 10,840 पर्यटक सफारी के लिए पहुंचे थे, जिनसे विभाग को 31,19,525 रुपये की आय हुई थी। आंकड़े बताते हैं कि पिछले सीजन में पर्यटकों की संख्या और राजस्व, दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
पांच साल में 42 हजार से अधिक पर्यटकों ने की सफारी
वन विभाग के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में कुल 42,864 पर्यटक जंगल सफारी का आनंद ले चुके हैं। इस अवधि में विभाग को करीब 1.23 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है।
पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या से इस क्षेत्र को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिल रही है। विभाग को उम्मीद है कि नए सीजन में भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचेंगे और जंगल सफारी के पिछले रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
मानसून में बंद रहते हैं रिजर्व के द्वार
हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि मानसून के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की हिफाजत को ध्यान में रखते हुए हर साल 30 जून को झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व के गेट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद 15 अक्टूबर से जंगल सफारी दोबारा शुरू की जाती है।
उन्होंने बताया कि इस बार भी सफारी शुरू होने के साथ पर्यटकों के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। यहां आने वाले सैलानी ऑफलाइन पंजीकरण कराकर जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं।
वन्यजीव पर्यटन को मिल रही नई पहचान
झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व में पर्यटकों की बढ़ती संख्या वन्यजीव पर्यटन की संभावनाओं को उजागर करती है। यहां की प्राकृतिक संपदा, विविध वन्यजीव और शांत वातावरण इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाते हैं। यदि इसी तरह पर्यटकों की आवाजाही बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह स्थान हरिद्वार के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष: जंगल सफारी के नए सीजन की शुरुआत के साथ झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने और जंगल की खूबसूरती का अनुभव करने के इच्छुक लोगों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प है। साथ ही, पर्यटकों की बढ़ती संख्या वन विभाग के राजस्व और क्षेत्र में प्रकृति-आधारित पर्यटन को भी मजबूती दे रही है।


