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गैरसैंण विधानसभा सत्र पर सियासी घमासान: दो दिन की अवधि को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, विपक्ष की रणनीति पर भी उठे सवाल

गैरसैंण, उत्तराखंड | 29 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित विधानसभा का दो दिवसीय सत्र समाप्त होने के बाद प्रदेश की राजनीति में सत्र की अवधि और विपक्ष की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सत्र की अवधि कम रखकर उसे जनहित के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। वहीं, सदन में विपक्ष की भूमिका और उसकी रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मौजूदा विधानसभा के अंतिम सत्र में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी हत्याकांड समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की थी, लेकिन इन विषयों पर सदन में व्यापक चर्चा नहीं हो सकी।

सड़क पर प्रदर्शन, लेकिन सदन में नहीं उठे सभी मुद्दे

विधानसभा सत्र की घोषणा के बाद कांग्रेस ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पलायन और वन्यजीवों के बढ़ते आतंक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की बात कही थी।

इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने 27 अक्टूबर को विधानसभा के पहले दिन सदन के बाहर प्रदर्शन और घेराव किया। पार्टी नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न जनसमस्याओं को उठाया।

हालांकि, राजनीतिक बहस का केंद्र अब इस बात पर है कि सड़क पर उठाए गए इन मुद्दों को विधानसभा के भीतर प्रभावी ढंग से क्यों नहीं उठाया जा सका। आलोचकों का मानना है कि विपक्ष के पास सदन में सरकार को घेरने के अवसर थे, लेकिन वह अपनी रणनीति को अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ा पाया।

दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि दो दिन के छोटे सत्र में उसे अपने मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

भ्रष्टाचार पर चर्चा की मांग को लेकर सरकार पर निशाना

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के अनुसार, कांग्रेस ने सत्र के दोनों दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले सदन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की थी।

आर्य का आरोप है कि कार्यस्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर भी उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न मुद्दों पर सवालों का जवाब देने से बचना चाहती है और इसी कारण विधानसभा सत्र की अवधि केवल दो दिन रखी गई।

नेता प्रतिपक्ष ने सत्र को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी कम अवधि में विपक्ष के लिए जनता से जुड़े विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखना मुश्किल हो गया।

गणेश गोदियाल ने भी उठाए सत्र की अवधि पर सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी दो दिवसीय सत्र को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए सत्र की अवधि सीमित रखी गई।

गोदियाल के मुताबिक, पहले दिन की कार्यवाही निधन संबंधी निर्देशों में बीत गई, जबकि दूसरे दिन अनुपूरक बजट और अन्य विधेयकों को पारित कराकर सत्र समाप्त कर दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा ही नहीं होनी थी, तो गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का उद्देश्य क्या था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सत्र पर खर्च होने वाला पैसा जनता का है और सरकार को इसकी उपयोगिता स्पष्ट करनी चाहिए।

विपक्ष की रणनीति पर भी उठ रहे सवाल

सत्र की अवधि को लेकर सरकार पर सवाल उठाने के साथ ही कांग्रेस की रणनीति पर भी चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, पार्टी ने सत्र से पहले कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का ऐलान किया था, लेकिन सदन में उसकी चर्चा मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के मुद्दे तक सीमित रही।

विपक्ष के सामने कार्यस्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता के दौरान अन्य विषयों को उठाने और सरकार से जवाब मांगने के विकल्प भी हो सकते थे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस ने उपलब्ध संसदीय अवसरों का कितना प्रभावी इस्तेमाल किया।

हालांकि, विपक्ष का पक्ष है कि सदन की सीमित अवधि और कार्यवाही के स्वरूप ने उसकी भूमिका को प्रभावित किया। ऐसे में विवाद केवल सत्र की अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी चर्चा का विषय है कि विपक्ष भविष्य में विधानसभा के भीतर और बाहर अपनी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाएगा।

मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र होने से बढ़ा महत्व

गैरसैंण में आयोजित यह सत्र मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र था। इस वजह से भी इसकी राजनीतिक अहमियत बढ़ गई थी। कांग्रेस ने सत्र से पहले जनहित के कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की थी, लेकिन सत्र समाप्त होने के बाद पार्टी ने कम अवधि को अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने में बाधा बताया है।

अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस आने वाले समय में इन मुद्दों को किस मंच पर और किस रणनीति के साथ उठाती है। वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया और सत्र की अवधि को लेकर उसका पक्ष इस बहस को आगे प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष

गैरसैंण विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद उत्तराखंड में सियासी बहस दो प्रमुख सवालों पर केंद्रित है—क्या दो दिन का सत्र जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त था और क्या विपक्ष सदन में उपलब्ध अवसरों का प्रभावी इस्तेमाल कर पाया? कांग्रेस ने कम अवधि को लेकर सरकार पर निशाना साधा है, जबकि विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, यह विवाद सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बना हुआ है।

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