स्थान: देहरादून/हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 10 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्तियों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने हरिद्वार के एक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापक की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए शिक्षा विभाग से शिकायत की है। संघ का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोड़े ने जांच की बात कही है। हालांकि, इस मामले पर मीडिया की ओर से विस्तृत जानकारी मांगने पर उन्होंने समय की कमी का हवाला दिया।
बेरोजगार संघ ने शिक्षा महानिदेशक के सामने उठाया मामला
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोड़े को शिकायत देकर हरिद्वार के एक विद्यालय में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति की जांच कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग में नियुक्तियों के दौरान प्रमाण पत्रों की सत्यता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय न हो।
संघ ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले लोगों के कारण विभाग की व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। अब संबंधित प्रधानाध्यापक की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों पर विभाग की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।
बेरोजगार संघ का दावा—पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने दावा किया कि उनके पास ऐसे कई मामले हैं, जिनमें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों के शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर काम करने की शिकायतें मिली हैं।
राम कंडवाल के मुताबिक, इससे पहले भी दो प्रधानाचार्यों के खिलाफ शिकायतें की गई थीं। उन्होंने दावा किया कि जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद दोनों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी कर्मचारी के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मीडिया के सवालों पर शिक्षा महानिदेशक ने नहीं दिया विस्तृत जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए मीडिया ने शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोड़े से विभाग में कथित फर्जी नियुक्तियों और मौजूदा शिकायत पर जानकारी लेने का प्रयास किया। हालांकि, उन्होंने समय नहीं होने की बात कहते हुए विस्तृत जवाब देने से इनकार कर दिया।
ऐसे में हरिद्वार के विद्यालय में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोपों पर विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। फिलहाल शिकायत की जांच और उसके निष्कर्षों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बर्खास्तगी के बाद वसूली और मुकदमे की कार्रवाई पर भी सवाल
शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति के आरोप नए नहीं हैं। समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें जांच के बाद कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी मिलती है।
हालांकि, बेरोजगार संघ और अन्य शिकायतकर्ताओं की ओर से यह सवाल भी उठाया जाता रहा है कि सेवा से बर्खास्तगी के बाद संबंधित कर्मचारियों से वेतन की वसूली और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई कहां तक पहुंची। इन पहलुओं पर विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।
जांच और पारदर्शिता पर टिकी निगाहें
हरिद्वार के विद्यालय में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के बाद अब शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
शिक्षा विभाग से अपेक्षा है कि वह शिकायत की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर निर्णय ले। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, जांच में आरोप गलत साबित होने पर स्थिति भी स्पष्ट की जानी जरूरी है, ताकि शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे।


