BREAKING

सर्व पितृ अमावस्या पर हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, पितरों की शांति के लिए उमड़े श्रद्धालु

स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 10 अक्टूबर 2026

पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार के प्रसिद्ध नारायणी शिला मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। शनिवार सुबह से ही देश के विभिन्न हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए मंदिर पहुंचने लगे। दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। इस दौरान लोगों ने विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और नारायण बलि सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए।

हर साल सर्व पितृ अमावस्या पर नारायणी शिला मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी मंदिर में विशेष चहल-पहल रही। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए। मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।

सर्व पितृ अमावस्या पर क्यों उमड़ती है इतनी भीड़?

हिंदू धर्म में सर्व पितृ अमावस्या को पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन पूर्वजों के निमित्त भी श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश पितृ पक्ष के दौरान उनका श्राद्ध नहीं हो पाया।

इसी मान्यता के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। नारायणी शिला मंदिर को पितृ कर्म के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है, जिसके कारण यहां हर साल श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।

पितरों के नाम पर जल अर्पित करने का भी विशेष महत्व

नारायणी शिला मंदिर के पुजारी रमेश गौड़ ने बताया कि सर्व पितृ अमावस्या पर मंदिर में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और नारायण बलि जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों के निमित्त पूजा करने से पितृकुल, मातृकुल और ससुराल पक्ष के पूर्वजों की शांति एवं मुक्ति की कामना की जाती है।

उन्होंने बताया कि मंदिर में रोजाना श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों के नाम से जल अर्पित कर उनका स्मरण करते हैं।

पितृ दोष से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचे श्रद्धालु

मंदिर में पूजा करने पहुंचे हरिराम पंवार ने बताया कि उन्होंने नारायणी शिला मंदिर के धार्मिक महत्व के बारे में काफी सुना था। इसी आस्था के साथ वह पितृ दोष से मुक्ति की कामना लेकर यहां पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।

वहीं, श्रद्धालु शिखर पालीवाल ने कहा कि नारायणी शिला मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। सर्व पितृ अमावस्या पर यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

श्रद्धालु अनमोल ने बताया कि उनके पूर्वजों से उन्हें अमावस्या के दिन नारायणी शिला मंदिर में पूजा करने की परंपरा के बारे में जानकारी मिली थी। वह सामान्य दिनों में भी मंदिर आते हैं, लेकिन सर्व पितृ अमावस्या पर विशेष रूप से अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना के साथ पूजा करने पहुंचे।

भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

सर्व पितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग लगाई गई और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

नारायणी शिला मंदिर के अलावा हरिद्वार के अन्य गंगा घाटों पर भी श्रद्धालु पूजा-पाठ, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई दिए। पितृ पक्ष के अंतिम दिन शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही चहल-पहल बनी रही।

आस्था और परंपरा के साथ संपन्न हुआ पितृ पक्ष का समापन

सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर नारायणी शिला मंदिर में उमड़ी भीड़ ने पितरों के प्रति लोगों की आस्था और धार्मिक परंपराओं के महत्व को दर्शाया। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

हरिद्वार में इस अवसर पर धार्मिक गतिविधियां दिनभर जारी रहीं। मंदिर और गंगा घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए गए, ताकि लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *