हरिद्वार, उत्तराखंड | 4 सितंबर 2026
हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहे 14 वर्षीय छात्र आर्यन भट्ट की नदी पार करते समय तेज बहाव की चपेट में आने से मौत हो गई। छात्र गुरुवार को नदी में बह गया था, जिसके बाद पुलिस, जल पुलिस और ग्रामीणों ने तलाश अभियान चलाया। शुक्रवार को उसका शव बरामद होने के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
स्कूल से घर लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
पुलिस के अनुसार रसूलपुर निवासी आर्यन भट्ट पुत्र मंगलेश भट्ट गुरुवार को स्कूल की छुट्टी के बाद अपने एक साथी छात्र के साथ घर लौट रहा था। दोनों काली मंदिर वाले रास्ते से रवासन नदी की ओर पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि आर्यन का साथी उसे नदी किनारे तक छोड़ने के बाद वापस लौट गया, जबकि आर्यन अकेले ही नदी पार कर अपने घर जाने लगा। इसी दौरान जब वह नदी के बीच मझधार में पहुंचा तो तेज बहाव की चपेट में आ गया और देखते ही देखते पानी में बह गया।
दोपहर डेढ़ बजे के आसपास नदी में बहने की आशंका
घटना गुरुवार दोपहर करीब 1:30 बजे की बताई जा रही है। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब आर्यन घर नहीं पहुंचा तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिवार के लोगों ने आसपास के क्षेत्रों, रिश्तेदारों और परिचितों से उसके बारे में जानकारी जुटाई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
इसके बाद ग्रामीणों को आशंका हुई कि आर्यन रवासन नदी पार करते समय तेज बहाव में बह गया होगा। सूचना मिलने पर श्यामपुर कोतवाली पुलिस और जल पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और नदी में व्यापक तलाश अभियान शुरू किया गया।
तलाश अभियान के बाद नदी से बरामद हुआ शव
पुलिस, जल पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों ने नदी के विभिन्न हिस्सों में छात्र की तलाश की। काफी खोजबीन के बाद आर्यन का शव नलोवाला कक्ष के सामने रवासन नदी से बरामद किया गया।
शव मिलने की सूचना जैसे ही परिजनों तक पहुंची, परिवार में मातम पसर गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की और पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
दो बहनों का इकलौता भाई था आर्यन
आर्यन भट्ट अपने परिवार का इकलौता बेटा और दो बहनों का अकेला भाई था। उसके पिता मंगलेश भट्ट वन विभाग में दैनिक मजदूर के रूप में कार्य करते हैं।
कम उम्र में आर्यन की अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। बेटे को खोने के बाद माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी इस दर्दनाक घटना के बाद शोक और गम का माहौल बना हुआ है।
पुल बनने के बावजूद ग्रामीणों और छात्रों की नदी पार करने की मजबूरी
स्थानीय लोगों के अनुसार मीठीबेरी गांव के पास रवासन नदी पर करीब 300 मीटर स्पान का पुल बनाया गया है। इसके बावजूद रसूलपुर गांव के कई ग्रामीण और छात्र दूरी अधिक होने के कारण सीधे नदी पार करके आवागमन करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में रवासन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और पानी का बहाव बेहद तेज हो जाता है। ऐसे समय में नदी पार करना जानलेवा साबित हो सकता है।
बताया जा रहा है कि कई लोग समय और दूरी बचाने के लिए नदी के रास्ते आवागमन करते हैं, लेकिन बरसाती मौसम में यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।
बरसात के मौसम में नदी-नालों से दूर रहने की जरूरत
इस हादसे ने एक बार फिर बरसात के दौरान उफनती नदियों और तेज बहाव वाले जलस्रोतों को पार करने के खतरों को सामने ला दिया है। थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रशासन और स्थानीय स्तर पर लोगों को लगातार तेज बहाव वाली नदियों और नालों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से बच्चों और छात्रों को ऐसे रास्तों से गुजरने से रोकने की जरूरत है, जहां पानी का बहाव सामान्य से अधिक हो।
निष्कर्ष
हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में 14 वर्षीय आर्यन भट्ट की रवासन नदी में डूबने से हुई मौत बेहद दुखद और चिंताजनक घटना है। दो बहनों के इकलौते भाई की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
यह हादसा उन लोगों के लिए भी गंभीर चेतावनी है जो बरसात के दौरान दूरी कम करने या समय बचाने के लिए उफनती नदियों को पार करने का जोखिम उठाते हैं। तेज बहाव वाली नदी को पार करने की एक छोटी सी कोशिश भी जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।


