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उत्तराखंड में राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठकों की परंपरा: निशंक ने रखी नींव, धामी ने बढ़ाया सिलसिला, जानिए इसके पीछे की वजह

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 12 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड में कैबिनेट की बैठकें आमतौर पर राजधानी देहरादून में आयोजित होती हैं, लेकिन समय-समय पर सरकारें प्रदेश के दूसरे जिलों में भी मंत्रिमंडल की बैठक बुलाती रही हैं। इसका मकसद केवल बैठक का स्थान बदलना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय समस्याओं को समझना, स्थानीय विकास को प्राथमिकता देना और जनता तक सरकार की पहुंच सुनिश्चित करना भी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अक्टूबर 2026 में चंपावत जिले के बनबसा और हरिद्वार में कैबिनेट बैठकें आयोजित कीं। बनबसा में 4 अक्टूबर को हुई बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जबकि 12 अक्टूबर को हरिद्वार में आयोजित बैठक में 13 प्रस्तावों पर मुहर लगी। करीब डेढ़ दशक से जारी इस परंपरा के पीछे प्रशासनिक जरूरतों के साथ-साथ राजनीतिक और क्षेत्रीय महत्व भी जुड़ा हुआ है।


हरिद्वार से हुई थी शुरुआत, निशंक सरकार ने बदली बैठक की परंपरा

उत्तराखंड में राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने की थी। उन्होंने हरिद्वार के हरकी पैड़ी क्षेत्र में मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित कर एक नई पहल की।

हरिद्वार धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उत्तराखंड का महत्वपूर्ण शहर है। ऐसे में यहां कैबिनेट बैठक आयोजित करना सरकार की ओर से यह संदेश देने का प्रयास था कि शासन और प्रशासन की गतिविधियां केवल सचिवालय तक सीमित नहीं हैं। बैठक के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने सामूहिक रूप से कुंभ स्नान भी किया था।

इस पहल ने प्रदेश की राजनीति में एक नई परंपरा को जन्म दिया, जिसे बाद की सरकारों ने भी अलग-अलग रूपों में जारी रखा।


विजय बहुगुणा सरकार में गैरसैंण को मिली नई पहचान

वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री बने विजय बहुगुणा ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उनकी सरकार में गैरसैंण में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जो राज्य की राजधानी और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े सवालों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रही।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान पर्वतीय क्षेत्र में राजधानी बनाने की मांग प्रमुखता से उठी थी। राज्य गठन के बाद भी पहाड़ के लोगों की अपेक्षा रही कि शासन का केंद्र उनके नजदीक हो, ताकि सरकारी कामकाज के लिए उन्हें बार-बार देहरादून का रुख न करना पड़े।

गैरसैंण में हुई कैबिनेट बैठक में अलग विधानसभा भवन बनाने का निर्णय लिया गया। इस फैसले ने गैरसैंण को राज्य की राजनीति में विशेष पहचान दिलाई। आगे चलकर भराड़ीसैंण में विधानसभा परिसर विकसित हुआ, जो उत्तराखंड की राजधानी से जुड़ी बहस का अहम हिस्सा बना।


हरीश रावत के कार्यकाल में कई जिलों तक पहुंचा मंत्रिमंडल

वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री बने हरीश रावत ने राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठकें आयोजित करने के मामले में इस परंपरा को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में अलग-अलग क्षेत्रों में मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित की गईं।

5 जून 2014 को अल्मोड़ा में, 20 अक्टूबर 2014 को केदारनाथ में और वर्ष 2015 में हरिद्वार जिले के चुड़ियाला में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई।

इन बैठकों के माध्यम से सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण इलाकों से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अब तक राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित करने के मामले में हरीश रावत के कार्यकाल में सबसे अधिक तीन बैठकों का रिकॉर्ड रहा है।


त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भराड़ीसैंण और टिहरी को दी प्राथमिकता

वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने भी इस सिलसिले को जारी रखा। उनके कार्यकाल में भराड़ीसैंण के साथ टिहरी और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित की गईं।

वर्ष 2018 में टिहरी झील के किनारे मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित करना पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखा गया। टिहरी झील को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुखता दिलाने और क्षेत्र में सुविधाओं के विकास की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिहाज से यह आयोजन महत्वपूर्ण माना गया।

इसके बाद 24 अक्टूबर 2019 को अल्मोड़ा में भी कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस तरह त्रिवेंद्र सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों तक शासन की गतिविधियों को पहुंचाने की पहल जारी रखी।


धामी सरकार में बनबसा से हरिद्वार तक पहुंची कैबिनेट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भी राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित करने की परंपरा जारी है। अक्टूबर 2026 में सरकार ने दो महत्वपूर्ण स्थानों पर मंत्रिमंडल की बैठकें कीं।

4 अक्टूबर 2026: बनबसा, चंपावत

चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में आयोजित कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सीमांत क्षेत्र में बैठक आयोजित करने का उद्देश्य वहां के विकास और स्थानीय जरूरतों पर सरकार का ध्यान केंद्रित करना था। इस पहल को सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाने के प्रयास के तौर पर भी देखा गया।

12 अक्टूबर 2026: हरिद्वार

हरिद्वार में आयोजित कैबिनेट बैठक में 13 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। आगामी कुंभ मेले को देखते हुए यह बैठक महत्वपूर्ण रही। सरकार ने कुंभ से संबंधित तैयारियों और विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।

हरिद्वार धार्मिक पर्यटन और प्रदेश में प्रवेश के प्रमुख मार्गों में से एक होने के कारण विशेष महत्व रखता है। ऐसे में यहां मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित करने से कुंभ की तैयारियों और शहर की विकास योजनाओं को प्राथमिकता देने का संदेश गया।


राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक करने के पीछे क्या है असली वजह?

वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी के मुताबिक, इस तरह की बैठकों के पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक, दोनों तरह के उद्देश्य होते हैं। किसी जिले में कैबिनेट बैठक आयोजित होने से वहां की समस्याओं, लंबित योजनाओं और विकास की जरूरतों पर सीधे चर्चा करने का अवसर मिलता है। स्थानीय अधिकारी अपनी योजनाओं और चुनौतियों से मंत्रिमंडल को अवगत करा सकते हैं।

उनके अनुसार, गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने का फैसला पर्वतीय क्षेत्रों में राजधानी से जुड़ी मांग के संदर्भ में महत्वपूर्ण था। वहीं, टिहरी में बैठक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने और बनबसा में बैठक सीमांत क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करने का माध्यम बनी।

हरिद्वार में कैबिनेट बैठक का महत्व आगामी कुंभ की तैयारियों से भी जुड़ा है। इसके अलावा, ऐसी बैठकें सरकार को स्थानीय लोगों के करीब पहुंचने और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का अवसर देती हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि सरकार जनता के बीच जाकर कैबिनेट बैठकें कर रही है, ताकि लोगों को यह महसूस हो कि शासन उनके द्वार तक पहुंच रहा है। उन्होंने हरिद्वार में आगामी कुंभ से जुड़े कार्यों को गति देने और शहर के विकास के लिए बेहतर प्रयास करने की बात कही।


क्या धामी तोड़ पाएंगे हरीश रावत का रिकॉर्ड?

उत्तराखंड में राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित करने की परंपरा लगभग डेढ़ दशक से चली आ रही है। रमेश पोखरियाल निशंक ने वर्ष 2010 में हरिद्वार से इसकी शुरुआत की। विजय बहुगुणा ने गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने का निर्णय लेकर इस परंपरा को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दिशा दी। हरीश रावत ने कई क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कीं, जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भराड़ीसैंण, टिहरी और अल्मोड़ा जैसे स्थानों को महत्व दिया। अब पुष्कर सिंह धामी भी बनबसा और हरिद्वार में बैठकें आयोजित कर इस सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठक आयोजित करने के मामले में हरीश रावत के नाम तीन बैठकों का रिकॉर्ड दर्ज है। अक्टूबर 2026 में धामी सरकार की दो बैठकों के बाद अब नजरें इस बात पर हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार कितनी और बैठकें आयोजित करती है।

निष्कर्ष

राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठकें आयोजित करना उत्तराखंड में केवल एक औपचारिक परंपरा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, प्रशासनिक पहुंच और राजनीतिक संदेश से जुड़ी पहल बन चुका है। हालांकि, इन बैठकों की वास्तविक सफलता का आकलन इस बात से होगा कि स्थानीय समस्याओं का कितना समाधान होता है, विकास योजनाओं को कितनी गति मिलती है और आम जनता को उनका कितना लाभ पहुंचता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धामी सरकार इस परंपरा को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और क्या वह हरीश रावत के तीन बैठकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ पाती है।

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