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आईएमपीसीएल के निजीकरण पर गरजे हरीश रावत, बोले- कंपनी नहीं, उसकी हजारों करोड़ की संपत्तियों पर है सरकार की नजर

रामनगर/अल्मोड़ा | 5 जून 2026

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) के निजीकरण के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। आईएमपीसीएल परिसर पहुंचकर उन्होंने कर्मचारियों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की तथा निजीकरण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक औद्योगिक इकाई का मामला नहीं है, बल्कि कुमाऊं क्षेत्र की आर्थिक पहचान, रोजगार और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ विषय है।


पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएमपीसीएल एक लाभ अर्जित करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो वर्षों से आयुर्वेदिक औषधियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके बावजूद सरकार द्वारा इसे निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की वास्तविक रुचि कंपनी के संचालन में नहीं बल्कि उसकी बहुमूल्य जमीन, परिसंपत्तियों और संसाधनों में है।


हरीश रावत ने दावा किया कि आईएमपीसीएल के पास लगभग दो हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां और संसाधन मौजूद हैं। ऐसे में निजीकरण के पीछे बड़े आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी को खरीददार के रूप में सामने लाया गया है, वह केवल एक फ्रंट कंपनी प्रतीत होती है और इसके पीछे कोई बड़ा कारोबारी समूह काम कर रहा है।


उन्होंने आशंका जताई कि वर्तमान खरीददार कंपनी लंबे समय तक आईएमपीसीएल के नाम और स्वरूप को बनाए नहीं रखेगी। उनका कहना था कि आने वाले एक से डेढ़ वर्ष के भीतर कंपनी का स्वरूप बदल सकता है और इसके स्थान पर किसी नए नाम और नई व्यवस्था के तहत एक अलग व्यावसायिक मॉडल विकसित किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्देश्य औद्योगिक विकास नहीं बल्कि संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना है।


पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनगर, मोहान, सल्ट, गुजरू और अल्मोड़ा क्षेत्र के हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं। आईएमपीसीएल केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। यदि इसका निजीकरण होता है तो इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर पड़ सकता है।


हरीश रावत ने कर्मचारियों के आंदोलन और संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग और आम जनता को भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी विरोध नहीं हुआ तो क्षेत्र एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति को खो देगा।


उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा जिले के इस एकमात्र प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान को बचाने के लिए व्यापक जन आंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इसे केवल एक कंपनी का मामला न समझें, बल्कि उत्तराखंड के सम्मान, स्वाभिमान और भविष्य से जुड़ा विषय मानकर आंदोलन का हिस्सा बनें।


पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएमपीसीएल की स्थापना का उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं था, बल्कि आयुर्वेद को बढ़ावा देना, स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय विकास को गति देना भी था। ऐसे में इसके निजीकरण के फैसले का दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है, जिस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।


निष्कर्ष

आईएमपीसीएल के निजीकरण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बहस तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार निजीकरण को संस्थान के भविष्य के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया करार दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा सामाजिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

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