देहरादून, 16 जून 2026
उत्तराखंड में आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिया है। मरीजों को कैशलेस इलाज देने से इनकार, अवैध वसूली और स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद तीन अस्पतालों की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है, जबकि एक अन्य अस्पताल पर 86,250 रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है।
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राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार यह कार्रवाई प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के निरीक्षण और शिकायतों की जांच के बाद की गई है। जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें पात्र लाभार्थियों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं दी गई और रेफर होकर पहुंचे मरीजों को भर्ती करने से भी मना कर दिया गया।
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प्राधिकरण ने बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज तथा देहरादून के ओजस्वी अस्पताल और अरिहंत अस्पताल की संबद्धता निलंबित कर दी है। वहीं देहरादून स्थित बलूनी अस्पताल पर वित्तीय दंड लगाने के साथ-साथ तय समयसीमा के भीतर व्यवस्थाओं में सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों से योजना के नियमों के विपरीत धनराशि वसूली गई। देहरादून के ओजस्वी अस्पताल में एक आयुष्मान लाभार्थी से 12 हजार रुपये की अवैध वसूली की शिकायत सही पाई गई। मामले की पुष्टि होने के बाद अस्पताल की संबद्धता निलंबित कर दी गई और उस पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
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निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई अन्य खामियां भी उजागर हुईं। अरिहंत अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं होना, सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी और चिकित्सकीय निगरानी में गंभीर लापरवाही पाई गई। इसके अलावा पोर्टल पर मरीजों और उपचार से संबंधित जानकारी दर्ज करने में भी अनियमितताएं सामने आईं। प्राधिकरण ने अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर कर विस्तृत सुधार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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वहीं बलूनी अस्पताल के खिलाफ जांच में यह पाया गया कि एक आयुष्मान लाभार्थी से दवाइयों और विभिन्न जांचों के नाम पर 17,250 रुपये की वसूली की गई। संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण समय पर उपलब्ध न कराने के कारण अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही अस्पताल प्रशासन को 15 दिनों के भीतर सभी खामियों को दूर कर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।
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राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने साफ तौर पर कहा है कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी अस्पतालों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है या मरीजों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित किया जाता है, तो उनके खिलाफ डी-एम्पैनलमेंट (सूची से स्थायी रूप से हटाने) जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
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निष्कर्ष
उत्तराखंड में आयुष्मान योजना के तहत की गई यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क और बाधा के पहुंचना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि मरीजों के अधिकारों और भरोसे की रक्षा की जा सके।


