हरिद्वार | 1 जुलाई 2026
उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत एक नई सौगात लेकर आई है। पहली बार राज्य सरकार समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के साथ कॉपियां भी उपलब्ध कराएगी। इस योजना का लाभ हरिद्वार जिले के लगभग छह लाख विद्यार्थियों को मिलेगा।
निदेशालय स्तर से कॉपियों की आपूर्ति शुरू हो चुकी है और रुड़की स्थित निशुल्क पाठ्य पुस्तक भंडारण एवं वितरण केंद्र पर कॉपियों की खेप पहुंचने लगी है। स्कूल खुलने के साथ ही चरणबद्ध तरीके से विद्यार्थियों को इनका वितरण किया जाएगा।
कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12 तक के सभी पात्र विद्यार्थियों को निशुल्क कॉपियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
योजना के तहत कक्षावार कॉपियों का वितरण इस प्रकार किया जाएगा—
- कक्षा 1 एवं 2 के प्रत्येक छात्र को एक कॉपी
- कक्षा 3, 4 एवं 5 के प्रत्येक छात्र को तीन कॉपियां
- कक्षा 6 से 12 तक के प्रत्येक छात्र को पांच-पांच कॉपियां
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों पर शैक्षणिक खर्च का बोझ कम करना और उन्हें आवश्यक अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध कराना है।
रुड़की वितरण केंद्र पर पहुंचनी शुरू हुई खेप
हरिद्वार जिले के रुड़की स्थित निशुल्क पाठ्य पुस्तक भंडारण एवं वितरण केंद्र पर कॉपियों की खेप पहुंचनी शुरू हो गई है।
केंद्र प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि कॉपियों की आपूर्ति लगातार जारी है और इन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिले के सभी सरकारी विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक महीने के भीतर जिले के सभी पात्र विद्यार्थियों को निशुल्क कॉपियां वितरित कर दी जाएंगी।
पहले ही वितरित की जा चुकी हैं निशुल्क पाठ्य पुस्तकें
शिक्षा विभाग के अनुसार नए शैक्षणिक सत्र के लिए सरकारी विद्यालयों में निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का शत-प्रतिशत वितरण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
अब कॉपियों की आपूर्ति शुरू होने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक दोनों प्रमुख शैक्षणिक सामग्री एक ही योजना के तहत उपलब्ध हो सकेगी।
मुख्यमंत्री की घोषणा अब हुई धरातल पर लागू
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने दिसंबर 2025 में सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को निशुल्क कॉपियां उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।
हालांकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत तक कॉपियां जिलों में नहीं पहुंच सकी थीं, जिसके कारण योजना का क्रियान्वयन प्रारंभ नहीं हो पाया था। अब आपूर्ति शुरू होने के साथ ही यह घोषणा धरातल पर उतरने लगी है।
परिवहन संबंधी तकनीकी कारणों से हुई थी देरी
सूत्रों के अनुसार कॉपियों के वितरण में हुई देरी का मुख्य कारण परिवहन व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया रही।
बताया गया कि निदेशालय स्तर पर आठ जिलों के लिए पाठ्य पुस्तकों के परिवहन का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन उसमें कॉपियों के परिवहन का प्रावधान शामिल नहीं था। इसी वजह से समय पर कॉपियों की आपूर्ति नहीं हो सकी।
बाद में शिक्षा विभाग ने टेंडर प्राप्त कंपनी को ही कॉपियों के परिवहन और वितरण की जिम्मेदारी भी सौंप दी, जिसके बाद अब जिलों में कॉपियों की खेप पहुंचनी शुरू हो गई है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों को मिलेगी राहत
शिक्षा विभाग का मानना है कि निशुल्क कॉपियों के वितरण से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी। कई ऐसे अभिभावक हैं जिनके लिए प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में किताबों और कॉपियों का खर्च वहन करना चुनौतीपूर्ण होता है।
सरकार की इस पहल से विद्यार्थियों को बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उनकी शिक्षा में निरंतरता बनी रहेगी।
निष्कर्ष
सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को पहली बार निशुल्क कॉपियां उपलब्ध कराने की योजना उत्तराखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत लागू की गई यह व्यवस्था न केवल लाखों छात्रों को आर्थिक राहत देगी, बल्कि शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अब शिक्षा विभाग का लक्ष्य निर्धारित समय के भीतर सभी विद्यालयों तक कॉपियां पहुंचाकर योजना का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।


