मसूरी (देहरादून) | 1 जुलाई 2026
मसूरी स्थित उप जिला चिकित्सालय में एक वर्षीय मासूम बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना से आक्रोशित परिजनों ने चिकित्सकों और अस्पताल स्टाफ पर समय पर इलाज नहीं देने का आरोप लगाया है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर बहस तेज हो गई है और मामला राजनीतिक चर्चाओं का भी विषय बन गया है।
परिजनों का आरोप—सुबह अस्पताल पहुंचे, लेकिन समय पर नहीं मिला इलाज
बार्लोगंज क्षेत्र निवासी मृतक बच्चे की मां का आरोप है कि वह सोमवार तड़के करीब पांच बजे अपने बीमार एक वर्षीय बेटे को लेकर उप जिला चिकित्सालय पहुंची थीं। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने पर न तो कोई डॉक्टर तत्काल उपलब्ध था और न ही इलाज के लिए पर्याप्त स्टाफ मौजूद था।
परिजनों के अनुसार काफी देर तक इंतजार और गुहार लगाने के बाद चिकित्सा कर्मी पहुंचे, लेकिन बच्चे का समुचित उपचार नहीं किया गया। उनका आरोप है कि उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक सुबह आठ बजे अस्पताल आएंगे। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते उपचार मिल जाता तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों ने मामले में जिम्मेदार चिकित्सकों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब तक नहीं दी गई कोई लिखित शिकायत
हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक मृतक बच्चे के परिजनों की ओर से न तो अस्पताल प्रशासन को कोई लिखित शिकायत सौंपी गई है और न ही मसूरी पुलिस में कोई तहरीर दी गई है। फिलहाल मामला मीडिया में लगाए गए आरोपों और अस्पताल प्रशासन की ओर से दी गई सफाई तक सीमित है।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
उप जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. खजान सिंह चौहान ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई गई।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध फुटेज में स्पष्ट दिखाई देता है कि जैसे ही महिला बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची, ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल मरीज को अटेंड किया। इसके कुछ ही समय बाद डॉक्टर भी मौके पर पहुंचे और बच्चे का चिकित्सकीय परीक्षण किया।
पहले से चल रहा था उपचार, नई दवाएं लिखकर दोबारा आने की दी गई थी सलाह
सीएमएस के अनुसार परिजनों ने चिकित्सकों को बताया था कि बच्चे का पहले से उपचार चल रहा था और वह दवाइयां भी ले रहा था।
डॉक्टरों ने जांच के बाद कुछ पुरानी दवाइयां बंद कर नई दवाइयां लिखीं तथा परिजनों को सलाह दी कि सुबह बच्चों के विशेषज्ञ चिकित्सक के आने पर बच्चे को दोबारा दिखाया जाए।
डॉ. चौहान का कहना है कि प्रथम दृष्टया अस्पताल की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है।
जांच समिति करेगी सभी पहलुओं की पड़ताल
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है। समिति चिकित्सा रिकॉर्ड, ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तार से जांच करेगी।
सीएमएस ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी डॉक्टर या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
घटना ने पकड़ा राजनीतिक रंग
मासूम की मौत के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया है। घटना के बाद कुछ स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए।
हालांकि, शहर के कई नागरिकों का मानना है कि इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय निष्पक्ष जांच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी की लापरवाही सिद्ध होती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो अस्पताल और चिकित्सकों की छवि को अनावश्यक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
मासूम की मौत से परिवार गहरे सदमे में है, जबकि अस्पताल प्रशासन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। अब पूरे मामले की सच्चाई जांच समिति की रिपोर्ट से सामने आएगी। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि घटना चिकित्सा लापरवाही का परिणाम थी या परिस्थितियां कुछ और थीं।
निष्कर्ष
मसूरी के उप जिला चिकित्सालय में एक वर्षीय बच्चे की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। एक ओर परिजन समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रशासन स्वयं को निर्दोष बताते हुए जांच का भरोसा दे रहा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक रिपोर्ट ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक होगी, वहीं बेबुनियाद आरोपों से भी बचना उतना ही जरूरी है।


