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उत्तराखंड में नाबालिग छात्रा के साथ जघन्य अपराध का खुलासा: दुष्कर्म और अवैध गर्भपात का मामला

दिनांक: 30 जून 2026

देहरादून, उत्तराखंड: एक हृदयविदारक मामला उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से प्रकाश में आया है, जहां एक 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और उसके बाद अवैध गर्भपात का प्रयास किया गया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कठोर कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं।

मामले का संक्षिप्त विवरण

पीड़ित छात्रा को डरा-धमकाकर दुष्कर्म करने का आरोप एक युवक पर है, जिसका नाम समद पुत्र अशरद अली निवासी रावली महदूद है। घटना की शुरुआत तब हुई, जब छात्रा पेट में तेज दर्द के कारण परिजनों के साथ बहादराबाद सेंटर पहुंची। वहां किए गए अल्ट्रासाउंड में पता चला कि पीड़िता 22 सप्ताह की गर्भवती है। परिजनों ने जब आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, तो पता चला कि छात्रा के साथ पूर्व में भी दुष्कर्म हो चुका है और आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी थी।

आयोग की कड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने तुरंत ही इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के अमानवीय कृत्य करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलेगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि घटना के दूसरे पहलू, यानी कि आरोपी द्वारा गर्भपात के प्रयास की भी जांच कराई जाए।

गैरकानूनी गर्भपात का प्रयास

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी ने पीड़िता का गर्भपात कराने के लिए रुड़की के एक निजी नर्सिंग होम का सहारा लिया। इस नर्सिंग होम में अवैध गर्भपात का प्रयास किया गया था, जिसे छुपाने का प्रयास किया जा रहा था। इस संबंध में आयोग ने जिलाधिकारी हरिद्वार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यदि जांच में कोई भी गैर-कानूनी गतिविधि पाई जाती है, तो संबंधित चिकित्सक या क्लिनिक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा और चेतावनी

कुसुम कण्डवाल ने कहा कि उत्तराखंड में बेटियों का सम्मान उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए और दोषियों को तुरंत सज़ा दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के घृणित अपराधों के खिलाफ समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर कड़ा कदम उठाना होगा।

निष्कर्ष

इस घटना ने उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर सवाल खड़ा कर दिया है। सरकार और संबंधित अधिकारियों पर यह जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं और पीड़ित को न्याय मिले। महिला आयोग की यह कार्रवाई इस दिशा में एक मजबूत संकेत है कि राज्य में बेटियों के प्रति अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। समाज को भी चाहिए कि वह इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाए और अपराधियों को उनके कृत्यों का उचित दंड दिलवाए।

 

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