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हरिद्वार पुलिस ने किया नकली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश, बिजनौर तक फैला नेटवर्क, लैपटॉप-प्रिंटर और 50 हजार के नकली नोट बरामद

हरिद्वार | 30 जून 2026

हरिद्वार पुलिस ने नकली नोट छापकर बाजार में खपाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 50 हजार रुपये मूल्य के छपे नकली नोट, लैपटॉप, दो हाई-क्वालिटी प्रिंटर, मोबाइल फोन और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले विशेष उपकरण बरामद किए हैं।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले तक फैला हुआ था। आरोपी पहले भी करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट बाजार में चला चुके हैं। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।


27 जून की कार्रवाई से खुला पूरा राज

मामले का खुलासा करते हुए एसपी सिटी (क्राइम) निशा यादव ने बताया कि 27 जून को श्यामपुर थाना पुलिस ने वनकर्मियों के साथ मारपीट के एक मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

उस कार्रवाई के दौरान आरोपियों की कार से 52,500 रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया, लेकिन पुलिस ने मामले की जांच जारी रखी। पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान मिले सुरागों ने पुलिस को नकली नोट बनाने वाले पूरे गिरोह तक पहुंचा दिया।


लालढांग तिराहे पर दबिश, कार से मिला पूरा सेटअप

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने लालढांग तिराहे के पास घेराबंदी कर संदिग्ध कार को रोक लिया।

तलाशी के दौरान पुलिस ने कार से एक लैपटॉप, एचपी और कैनन कंपनी के दो प्रिंटर, पांच मोबाइल फोन, 500 रुपये के चार असली नोट तथा 25 विशेष पेपर शीट बरामद कीं, जिन पर 500 रुपये के नकली नोट छपे हुए थे।

बरामद नोटों की कुल कीमत लगभग 50 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस के अनुसार इन नोटों की कटिंग अभी बाकी थी और इन्हें बाजार में खपाने की तैयारी चल रही थी।


ऑनलाइन मंगवाया जाता था विशेष वॉटरमार्क पेपर

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह नकली नोट तैयार करने के लिए विशेष प्रकार का वॉटरमार्क पेपर ऑनलाइन मंगवाता था।

पूरे नेटवर्क में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपियों ने नकली नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर और हाई-रिजॉल्यूशन प्रिंटिंग तकनीक का सहारा लिया था।


ऐसे तैयार किए जाते थे नकली नोट

जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह का सदस्य शगुन जोशी असली नोट की हाई-रिजॉल्यूशन फोटो लेकर उसे विशेष सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन की मदद से संपादित करता था।

इसके बाद लैपटॉप से तैयार फाइल को हाई-क्वालिटी प्रिंटर के जरिए विशेष वॉटरमार्क पेपर पर प्रिंट किया जाता था। अंत में नोटों की कटिंग कर उन्हें असली नोटों की तरह तैयार किया जाता था, ताकि उन्हें आसानी से बाजार में चलाया जा सके।


बिजनौर में पहले भी खपा चुके हैं नकली नोट

मुख्य आरोपी देवेन्द्र कुमार ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसने अपने साथी गुलजार अहमद के साथ मिलकर पहले भी बिजनौर के बड़ापुर क्षेत्र में लगभग एक लाख रुपये मूल्य के नकली नोट तैयार किए थे।

इनमें से कुछ नोट प्रिंटिंग के दौरान खराब हो गए थे, जबकि करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट सफलतापूर्वक बाजार में चला दिए गए। इस अवैध कारोबार से लाभ मिलने के बाद गिरोह ने अपने नेटवर्क का विस्तार किया।

इसके बाद देवेन्द्र ने अपने रिश्तेदार शिवम और तकनीकी जानकारी रखने वाले शगुन जोशी को भी इस गिरोह से जोड़ लिया।


तीन आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान इस प्रकार हुई है—

  • देवेन्द्र कुमार, निवासी सरदारपुर छामली, थाना बड़ापुर, जिला बिजनौर।
  • गुलजार अहमद, निवासी टांडा सिक्कावाला, थाना बड़ापुर, जिला बिजनौर।
  • शगुन जोशी, निवासी लालढांग, थाना श्यामपुर, जनपद हरिद्वार।

पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


तकनीकी जांच के जरिए नेटवर्क तक पहुंची पुलिस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 जून को नकली नोटों की पहली बरामदगी के बाद की गई तकनीकी जांच, पूछताछ और साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा संभव हो पाया।

दूसरी कार्रवाई में नकली नोट छापने के उपकरण, प्रिंटर, लैपटॉप और विशेष पेपर मिलने के बाद पुलिस ने दावा किया है कि वह गिरोह की जड़ तक पहुंच चुकी है।


बाजार में नकली नोट खपाने की थी तैयारी

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी छपे हुए नोटों की कटिंग पूरी करने के बाद उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में बाजार में चलाने की योजना बना रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक किन-किन स्थानों पर नकली नोट खपाए गए और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।


निष्कर्ष

हरिद्वार पुलिस की कार्रवाई ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग कर नकली भारतीय मुद्रा तैयार कर बाजार में खपाने की साजिश रच रहा था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में नकली नोट और प्रिंटिंग उपकरण बरामद किए हैं। अब जांच का दायरा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश तक फैले पूरे नेटवर्क की पहचान और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर केंद्रित है।

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