देहरादून | 30 जून 2026
उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई महीने में भी महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने जुलाई माह के लिए ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की नई दरें जारी कर दी हैं। इन संशोधित दरों के लागू होने के बाद जुलाई में आने वाले बिजली बिलों में अतिरिक्त राशि जुड़कर आएगी।
गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने और खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण यूपीसीएल की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इसी अतिरिक्त खर्च की भरपाई एफपीपीसीए के माध्यम से उपभोक्ताओं से की जा रही है।
लगातार तीसरे महीने बढ़े हुए बिल का असर
राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को मई और जून महीने में भी एफपीपीसीए के कारण अधिक बिल चुकाना पड़ा था। अब जुलाई के लिए भी नई दरें लागू कर दी गई हैं, जिससे लगातार तीसरे महीने बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
यूपीसीएल के मुख्य अभियंता (वाणिज्य) एन.एस. बिष्ट की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संशोधित एफपीपीसीए दरों के अनुसार अतिरिक्त राशि जुलाई माह के बिजली बिल में शामिल की जाएगी।
आखिर क्या है एफपीपीसीए?
एफपीपीसीए यानी फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत बिजली उत्पादन में प्रयुक्त ईंधन की लागत और बाहरी स्रोतों से खरीदी गई बिजली की अतिरिक्त कीमत का समायोजन उपभोक्ताओं के बिल में किया जाता है।
जब बिजली उत्पादन या खरीद की लागत बढ़ जाती है, तब नियमानुसार निर्धारित अतिरिक्त शुल्क बिजली उपभोक्ताओं के बिल में जोड़ा जाता है। वहीं लागत कम होने पर एफपीपीसीए की दरों में कमी भी की जा सकती है।
किन उपभोक्ताओं पर कितना बढ़ा अतिरिक्त शुल्क?
यूपीसीएल द्वारा जारी नई एफपीपीसीए दरों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट निम्नलिखित अतिरिक्त शुल्क लागू होगा—
| उपभोक्ता श्रेणी | प्रति यूनिट बढ़ोतरी |
|---|---|
| बीपीएल उपभोक्ता | 5 पैसे |
| घरेलू उपभोक्ता | 12 से 13 पैसे |
| गैर-घरेलू उपभोक्ता | 18 से 19 पैसे |
| सरकारी सार्वजनिक उपयोगिता संस्थान | 18 पैसे |
| निजी ट्यूबवेल | 6 पैसे |
| कृषि गतिविधियां | 8 से 9 पैसे |
| एलटी उद्योग | 16 से 17 पैसे |
| एचटी उद्योग | 17 पैसे |
| मिश्रित लोड उपभोक्ता | 17 पैसे |
| रेलवे ट्रैक्शन | 16 पैसे |
| ईवी चार्जिंग स्टेशन | 16 पैसे |
| अस्थायी कनेक्शन | 20 पैसे |
गर्मियों में बढ़ी बिजली खरीद की लागत
ऊर्जा विभाग के अनुसार गर्मियों के दौरान प्रदेश में बिजली की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। मांग पूरी करने के लिए यूपीसीएल को बिजली एक्सचेंज और अन्य स्रोतों से ऊंची कीमत पर अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है।
बिजली खरीद की इसी बढ़ी हुई लागत का प्रभाव एफपीपीसीए के रूप में उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक पड़ेगा असर
नई दरों का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। व्यापारिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों, कृषि उपभोक्ताओं, निजी ट्यूबवेल संचालकों, रेलवे, ईवी चार्जिंग स्टेशनों तथा अस्थायी बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को भी जुलाई माह में अधिक बिजली बिल का भुगतान करना होगा।
हालांकि प्रति यूनिट बढ़ोतरी सीमित दिखाई देती है, लेकिन जिन उपभोक्ताओं की मासिक बिजली खपत अधिक है, उनके कुल बिल में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई देगा।
उपभोक्ताओं पर लगातार बढ़ रहा आर्थिक दबाव
लगातार कई महीनों से एफपीपीसीए लागू होने के कारण घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं का मासिक बिजली खर्च बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से गर्मियों में एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली खपत बढ़ने पर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में जुलाई माह के लिए लागू की गई नई एफपीपीसीए दरों के बाद बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा। बढ़ती ईंधन लागत और बाजार से महंगी बिजली खरीदने के कारण यूपीसीएल ने अतिरिक्त शुल्क लागू किया है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए बिजली की बचत और ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग पर ध्यान देना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, ताकि बढ़ते बिजली खर्च का प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सके।


