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पिथौरागढ़ में कांग्रेस का ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ बना विवाद का मंच, प्रदेश अध्यक्ष के सामने खुलकर दिखी गुटबाजी, विधायक मयूख महर नाराज होकर निकले

पिथौरागढ़ / देहरादून | 30 जून 2026

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर सामने आ गई। पिथौरागढ़ में आयोजित ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ उस समय विवादों में घिर गया, जब कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक मयूख महर नाराज होकर मंच और सभागार छोड़कर बाहर निकल गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मंच पर मौजूद थे और स्थिति को संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया।

कार्यक्रम के दौरान हुई बयानबाजी, समर्थकों की नारेबाजी और नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद ने कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों का खुला प्रदर्शन है।


परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ विवाद

प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा वर्ष 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत पूरे उत्तराखंड में ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ आयोजित किए जा रहे हैं। इसी अभियान के तहत पिथौरागढ़ में आयोजित सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने का संदेश देना था।

कार्यक्रम की शुरुआत में मंच से स्पष्ट घोषणा की गई कि सम्मेलन में केवल संगठन विस्तार, जनहित के मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। लेकिन पहले ही संबोधन के दौरान माहौल बदल गया।


महिला कांग्रेस अध्यक्ष के भाषण से बढ़ा विवाद

जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष भावना नगरकोटी ने अपने संबोधन के दौरान नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण और पार्टी लाइन से अलग गतिविधियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बिना नाम लिए पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर पर परोक्ष रूप से निशाना साधा।

भाषण के दौरान लगाए गए आरोपों और राजनीतिक टिप्पणियों से मंच का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। विधायक मयूख महर ने इसे अपनी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास बताया और नाराजगी जताते हुए अपने समर्थकों के साथ सभागार से बाहर चले गए।


स्थिति संभालने के प्रयास भी रहे बेअसर

विवाद बढ़ने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने मंच से भावना नगरकोटी से अपना संबोधन समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने बोलना जारी रखा।

इस बीच प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी अपनी सीट से उठकर मंच पर पहुंचे और माहौल शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि तब तक विधायक मयूख महर विरोध दर्ज कराते हुए कार्यक्रम छोड़ चुके थे।


समर्थकों की नारेबाजी से और बढ़ा तनाव

विधायक मयूख महर के सभागार से बाहर निकलते ही उनके समर्थक भी कार्यक्रम से बाहर जाने लगे। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने मंच के सामने “मयूख महर मुर्दाबाद” के नारे लगाए, जिससे सम्मेलन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में हुई इस नारेबाजी ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया।


कार्यक्रम छोड़ने के बाद मयूख महर ने क्या कहा?

सभागार से बाहर आने के बाद विधायक मयूख महर ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनाव की रणनीति पर चर्चा करना था, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर कार्यक्रम को विवादित बनाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि वक्ता को महिलाओं, युवाओं, दलितों और संगठन विस्तार पर अपने विचार रखने चाहिए थे, लेकिन मंच का इस्तेमाल व्यक्तिगत राजनीतिक आरोप लगाने के लिए किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग कांग्रेस की प्रगति से परेशान हैं और कार्यक्रम को खराब करने के लिए सुनियोजित प्रयास किया गया।

मयूख महर ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कार्यक्रम में बैठे रहने का कोई औचित्य नहीं था, इसलिए उन्होंने बैठक का बहिष्कार करना उचित समझा।


गणेश गोदियाल बोले— संयम बनाए रखें

विवाद के बाद जब प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने पूरे घटनाक्रम को ज्यादा तूल न देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े कार्यक्रमों में कभी-कभी कुछ कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया से ऐसी स्थिति बन जाती है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वह स्वयं विधायक मयूख महर से मिलकर पूरे मामले पर बातचीत करेंगे।

बाद में मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का माहौल कुछ लोगों की वजह से प्रभावित हुआ है और सभी को संगठन हित को सर्वोपरि रखते हुए विवेकपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।


2027 चुनाव की तैयारी के बीच सामने आया विवाद

कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पूरे प्रदेश में ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ अभियान शुरू किया है। पहले चरण में 10 जुलाई तक पर्वतीय जिलों में सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसके लिए पूरे प्रदेश को चार जोन में विभाजित कर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पिथौरागढ़ का सम्मेलन इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद ने संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए।


पिछले नगर निगम चुनाव से जुड़ा माना जा रहा है विवाद

राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस विवाद की जड़ वर्ष 2025 में हुए पिथौरागढ़ नगर निगम चुनाव से जुड़ी मानी जा रही है।

उस चुनाव में विधायक मयूख महर अपनी समर्थक मोनिका महर को कांग्रेस का टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने अंजू लुंठी को अधिकृत प्रत्याशी बनाया। टिकट नहीं मिलने के बाद मोनिका महर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गईं और विधायक ने उनका समर्थन किया।

इस घटनाक्रम से कांग्रेस दो गुटों में बंट गई और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। भाजपा प्रत्याशी कल्पना देवलाल ने बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीत लिया।

चुनाव परिणामों के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी अंजू लुंठी को 3,379 वोट मिले, जबकि बागी उम्मीदवार मोनिका महर को 9,449 वोट प्राप्त हुए। यदि दोनों के मत एकजुट रहते तो कांग्रेस भाजपा से काफी आगे रहती। माना जा रहा है कि उसी राजनीतिक खींचतान की झलक अब परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के मंच पर भी दिखाई दी।


भाजपा को मिला राजनीतिक हमला करने का मौका

कांग्रेस के सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से सामने आए विवाद ने विपक्ष को भी हमला बोलने का अवसर दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले संगठन के भीतर दिखाई दे रही गुटबाजी भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।


निष्कर्ष

पिथौरागढ़ में आयोजित परिवर्तन संकल्प सम्मेलन कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती का मंच बनने के बजाय आंतरिक मतभेदों का प्रतीक बन गया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में विधायक मयूख महर का मंच छोड़ना, समर्थकों की नारेबाजी और नेताओं के बीच सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप ने यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर गुटबाजी अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन में अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने की होगी।

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