देहरादून/विकासनगर | 9 अगस्त 2026
उत्तराखंड में स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव से जुड़े ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत हो गई है। अभियान के तहत प्रदेशभर में तिरंगा यात्राओं और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। देहरादून में भाजपा की ओर से तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी लोगों से स्वतंत्रता दिवस पर अपने घरों में तिरंगा फहराने की अपील की।
देहरादून में तिरंगा यात्रा, मुख्यमंत्री ने दिलाया राष्ट्रध्वज के सम्मान का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तिरंगा यात्रा के दौरान कहा कि राष्ट्रीय ध्वज करोड़ों भारतीयों के स्वाभिमान, एकता और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के महानायक स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने-अपने घरों पर तिरंगा फहराने और देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले वीर सेनानियों को नमन करने का आह्वान किया।
विकासनगर में महिला समूहों ने संभाली तिरंगा निर्माण की जिम्मेदारी
एक ओर जहां प्रदेश में तिरंगा यात्राओं के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया जा रहा है, वहीं विकासनगर और सहसपुर क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हुनर से इस अभियान को मजबूती दे रही हैं।
सहसपुर ब्लॉक के शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट में ग्रामीण महिलाएं हाथ से सूती कपड़े के राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना यानी रीप तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से संचालित इस यूनिट में अब तक 5,000 से अधिक तिरंगे तैयार किए जा चुके हैं।
तिरंगा निर्माण से महिलाओं को मिल रहा रोजगार
राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का काम महिलाओं के लिए केवल स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी गतिविधि नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार का माध्यम भी बन रहा है। महिलाएं अपने कौशल का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग आकार के तिरंगे तैयार कर रही हैं।
हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों की ओर से भी इन हस्तनिर्मित तिरंगों की मांग रहती है।
महिलाओं के समूहों के लिए तिरंगा निर्माण और बिक्री से होने वाली आय आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। बीते गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा निर्माण और बिक्री से समूह की महिलाओं ने करीब एक लाख रुपये की बचत अर्जित की थी।
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिल रही जमीन पर मजबूती
सहसपुर की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और अपने कौशल का इस्तेमाल कर राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण महिलाओं को आय का साधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम हो रहा है।
हाथ से तैयार किए जा रहे सूती तिरंगे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में स्थानीय भागीदारी का उदाहरण बन रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि तिरंगा तैयार करना उनके लिए आर्थिक गतिविधि के साथ देशभक्ति से जुड़ने का भी अवसर है।
सिलाई यूनिट बनी ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का केंद्र
शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट का संचालन कर रहीं जयमाला के अनुसार, यूनिट के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने घर और क्षेत्र में रहकर काम करने का अवसर मिल रहा है। विभागीय स्तर से राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के ऑर्डर मिलने के कारण महिलाओं को नियमित काम भी मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के काम से महिलाओं को अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने और अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है। यूनिट में तैयार किए जा रहे तिरंगे अलग-अलग संस्थानों और अभियानों की जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
15 से 20 महिलाएं लगातार कर रहीं तिरंगा तैयार
रीप की जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि सहसपुर ब्लॉक में रीप परियोजना के तहत सिलाई यूनिट स्थापित की गई है। इसी यूनिट में आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि महिलाएं पहले भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगे तैयार करती रही हैं, लेकिन सिलाई यूनिट स्थापित होने के बाद इस काम को बड़े स्तर पर करने की सुविधा मिली है।
वर्तमान में करीब 15 से 20 महिलाएं राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने में जुटी हैं। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को देखते हुए तिरंगों की मांग बढ़ी है और विभागीय स्तर पर भी महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए झंडों की खरीद की जा रही है।
अलग-अलग आकार के तिरंगे तैयार कर रहे महिला समूह
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में रीप और एनआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाएं अपनी रुचि और कौशल के अनुरूप अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए महिला समूहों द्वारा विभिन्न आकार के राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जा रहे हैं। इससे एक ओर अभियान में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर भी मिल रहा है।
हर घर तिरंगा अभियान का उद्देश्य
‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागरिकों को अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।
उत्तराखंड में इस अभियान के साथ ग्रामीण महिला समूहों की भागीदारी इसे रोजगार और स्थानीय स्वरोजगार से भी जोड़ रही है। विकासनगर की महिलाएं बड़ी संख्या में तिरंगे तैयार कर इस अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान इस बार केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और महिला सशक्तिकरण का माध्यम भी बनता दिखाई दे रहा है। विकासनगर और सहसपुर की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हजारों हस्तनिर्मित तिरंगे तैयार कर राष्ट्रीय उत्सव में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। एक ओर देहरादून में तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रगौरव का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहे तिरंगे अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान कर रहे हैं।



