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उत्तराखंड में मिड डे मील और छात्र संख्या की होगी व्यापक जांच, पांच जिलों के स्कूलों और मदरसों पर शिक्षा विभाग की नजर

देहरादून, उत्तराखंड | 22 जून 2026

उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लाभार्थियों के वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। हरिद्वार जिले के मदरसों में हजारों फर्जी नामांकन सामने आने के बाद अब राज्य के पांच जिलों के सरकारी स्कूलों और मदरसों में छात्र संख्या तथा मिड डे मील (प्रधानमंत्री पोषण योजना) की विशेष जांच कराई जाएगी।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र विद्यार्थियों तक ही पहुंचे।


हरिद्वार की जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

हाल ही में हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा मदरसों में चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि मार्च 2026 तक मदरसों के अभिलेखों में 31,780 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज था, जबकि अप्रैल 2026 में भौतिक सत्यापन के बाद यह संख्या घटकर 19,491 रह गई।

इस प्रकार कुल 12,289 विद्यार्थियों का नामांकन फर्जी पाया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संस्थानों को इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विभिन्न सरकारी योजनाओं के साथ-साथ मिड डे मील योजना का लाभ भी मिल रहा था।


पांच जिलों में होगी छात्र संख्या और मिड डे मील की जांच

हरिद्वार में सामने आए मामले के बाद शिक्षा विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून के मैदानी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या और मिड डे मील वितरण की जांच की जाएगी।

इसके अलावा पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र तथा नैनीताल जिले के हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्रों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।

जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि विद्यालयों में वास्तविक रूप से कितने छात्र अध्ययनरत हैं और उसी अनुपात में मिड डे मील तैयार किया जा रहा है या नहीं। यदि कहीं रिकॉर्ड और वास्तविक उपस्थिति में अंतर पाया जाता है तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


संयुक्त टीम करेगी सत्यापन

शिक्षा विभाग के अनुसार जांच कार्य शिक्षा महानिदेशालय, प्रधानमंत्री पोषण योजना (पीएम पोषण) कार्यालय और संबंधित जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों की संयुक्त निगरानी में किया जाएगा।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यालयों और मदरसों में जाकर वास्तविक छात्र संख्या का भौतिक सत्यापन करें तथा मिड डे मील के लिए जारी की गई खाद्यान्न और वित्तीय सहायता का मिलान करें।


गलत भुगतान की होगी वसूली

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने भी हरिद्वार मामले को गंभीरता से लिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन मदरसों में वास्तविक छात्र संख्या और सरकारी अभिलेखों में दर्ज संख्या के बीच अंतर पाया गया है, वहां दी गई अतिरिक्त सरकारी धनराशि की वसूली की जाएगी।

साथ ही अन्य जिलों में संचालित मदरसों का भी सत्यापन किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी स्तर पर सरकारी धन का दुरुपयोग न हो।


लाखों विद्यार्थियों को मिल रहा योजना का लाभ

प्रदेश में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी, अशासकीय विद्यालयों और मदरसों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को प्रतिदिन पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान प्राथमिक स्तर पर 3,15,579 विद्यार्थियों तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 2,41,620 विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिला। इस प्रकार कुल 5,57,199 छात्र-छात्राएं योजना से लाभान्वित हुए हैं।


शिक्षा विभाग ने दिए सख्त संकेत

शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान विद्यालयों और मदरसों में वास्तविक छात्र संख्या तथा मिड डे मील वितरण की स्थिति का मिलान किया जाएगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का मानना है कि इस सत्यापन अभियान से योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।


निष्कर्ष

हरिद्वार के मदरसों में सामने आए फर्जी नामांकन मामले ने शिक्षा और पोषण योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब पांच जिलों में शुरू होने जा रही व्यापक जांच से न केवल वास्तविक छात्र संख्या का पता चलेगा, बल्कि मिड डे मील योजना के क्रियान्वयन की भी हकीकत सामने आएगी। यदि कहीं अनियमितताएं मिलती हैं तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई और सरकारी धन की वसूली की संभावना भी बढ़ गई है।

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