देहरादून, 16 मई 2026
उत्तराखंड में जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से जुड़े कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। प्रदेशभर के सब रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार कार्यालयों के अधिकारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिसके चलते रजिस्ट्री व्यवस्था ठप हो गई है। इस हड़ताल का सीधा असर आम लोगों, प्रॉपर्टी कारोबार और राजस्व कार्यों पर पड़ रहा है।
हड़ताल की शुरुआत विकासनगर उप निबंधक कार्यालय में सामने आए रजिस्ट्री फर्जीवाड़े और स्टांप चोरी के मामले के बाद हुई। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा विकासनगर की उप निबंधक अपूर्वा सिंह के निलंबन की संस्तुति किए जाने के बाद रजिस्ट्रार संघ ने सामूहिक विरोध का निर्णय लिया।
अधिकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त तथ्य और प्रक्रिया का पालन किए कार्रवाई की है, जिससे पूरे विभाग में असंतोष का माहौल बन गया है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
प्रदेशभर के सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में शनिवार से कामकाज पूरी तरह बाधित रहा। जमीनों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की रजिस्ट्री नहीं हो सकी, जिससे दूर-दराज से पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। कई परिवारों और कारोबारियों के महत्वपूर्ण सौदे अटक गए हैं।
रजिस्ट्रार संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी और प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।
यह है पूरा मामला
विकासनगर उप निबंधक कार्यालय में बड़े पैमाने पर रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा और स्टांप चोरी का मामला सामने आया है। जांच में गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी जमीनों की करीब 150 अवैध रजिस्ट्रियों का खुलासा हुआ है। साथ ही करोड़ों रुपये की स्टांप चोरी और वर्षों से दबाकर रखे गए मूल विलेख भी जांच में मिले हैं।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 से 2025 के बीच कई महत्वपूर्ण दस्तावेज कार्यालय में लंबित और डंप पाए गए। चार मई को जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उप निबंधक अपूर्वा सिंह के निलंबन की संस्तुति की और विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित की।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद रजिस्ट्रार और सब रजिस्ट्रार संघ ने इसे अधिकारियों के खिलाफ कठोर और एकतरफा कार्रवाई बताते हुए सामूहिक हड़ताल का रास्ता चुना। हड़ताल के चलते प्रदेश में जमीनों की रजिस्ट्री, दस्तावेज सत्यापन और अन्य संबंधित कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में रजिस्ट्री विभाग की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने प्रशासन और जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर जहां फर्जीवाड़े और स्टांप चोरी जैसे गंभीर मामलों की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर विभागीय विरोध के कारण आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब सबकी नजर सरकार और रजिस्ट्रार संघ के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके।


